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Author: Siddhbhoomi Team
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
सरकार ने चुनिंदा UPI ट्रांज़ैक्शन के लिए एक नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ़्रेमवर्क घोषित किया है। इसके तहत, मर्चेंट्स को 2,000 रुपये से ज़्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) पेमेंट पर फ़ीस देनी होगी, जबकि कंज्यूमर्स मुफ़्त में UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। यह नया फ़्रेमवर्क 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा। स्टैंडर्ड P2M स्ट्रक्चर के तहत, 2,000 रुपये से ज़्यादा के UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। 75,000 रुपये और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए, MDR की सीमा प्रति ट्रांज़ैक्शन 300 रुपये तय की जाएगी। यह चार्ज मर्चेंट अपने एक्वायरिंग बैंक को देंगे और इसे ग्राहकों पर नहीं…
कांग्रेस की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद ने जेल में बंद छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद को मंगलवार को एक राष्ट्रवादी बताया। हरिप्रसाद ने कहा कि खालिद पर बनी वृत्तचित्र फिल्म की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) में स्क्रीनिंग का विरोध करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को जेल में बंद नेता के बारे में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। सितंबर 2020 में गिरफ्तार किए गए खालिद पर फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगों के ‘‘मुख्य साजिशकर्ताओं’’ में से एक होने के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया…
शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान तेजी से गिरावट देखने को मिली। सुबह की बढ़त पूरी तरह गायब हो गई और सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर से करीब 1,400 अंक फिसलकर गहरे लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 74,003.82 पर रहा। वहीं निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत टूटकर 23,118.60 पर बंद हुआ।मंगलवार को बाजार में गिरावट का असर काफी व्यापक रहा। करीब 1,070 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 3,054 शेयरों में गिरावट आई और 134 शेयर बिना बदलाव के बंद हुए। बड़ी कंपनियों की तुलना में मझोली और छोटी कंपनियों के…
हर गुजरते दिन के साथ चीन भारत के लिए और भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। चीन ने रणनीतिक तरीके से भारत को घेरना भी शुरू कर दिया है। चीन ने हाल के कुछ सालों में नेपाल, पाकिस्तान, म्यांमार और श्रीलंका के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाकर भारत के खिलाफ स्ट्रैजिक प्लानिंग में लगा है। विशेषज्ञों ने उसे स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स का का नाम दिया है। आपको ये लगता होगा कि चीन हमेशा अपनी सीमा से आगे बढ़कर बॉर्डर वाले इलाकों के जरिये भारत में कब्जा जमाना जमाना चाहता है। लेकिन ये अकेला ऐसा इलाका नहीं है जहां से चीन…
आराम के फिराक में था एक कीड़ा पेड़ की पत्ती पर बैठा कुकून बनाने की जद्दोजहद में लगा हुआ था बेचारा लेकिन उसे कहां पता था कि एक रोज उसके कुकून का धागा बनाकर उस धागे से बने रुमाल को हिलाते हुए नायिका गाना गाएगी रेशम का रुमाल गले में डालकर तू आ जाना दिलदार मेरे रेशम यानी सिल्क से आपको हो सकता है रुमाल याद आए या शॉल या साड़ी लेकिन एक चीज और है जिसका नाम सिल्क से ही याद आता है सिल्क रूट या सिल्क रोड 2000 साल पहले तैयार किया हुआ एक रास्ता जो एशिया को…
दिल्ली की एक अदालत ने 2019 में चचेरे भाई पर बर्फ तोड़ने वाले सुए से वार करने के आरोपी एक व्यक्ति को मंगलवार को बरी कर दिया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय कुमार दहिया उस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कृष्ण गोदारा पर अक्टूबर 2019 में नांगलोई में संजीव गोदारा पर हमला करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत आरोप लगाए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा, “चिकित्सीय साक्ष्य अभियोजन पक्ष के गवाहों की ओर से दिए गए बयानों से मेल नहीं खाते और कुल मिलाकर यह…
अक्टूबर 2019 की बात है महीने की 27 तारीख को दीवाली थी। लेकिन नेपाल की राजधानी काठमांडू में करीब एक पखवाड़े पहले ही दिवाली का माहौल बन गया था। रंग रोगन का काम चल रहा था, गड्ढे भरे जा रहे थे। कुल मिलाकर बोलचाल की भाषा में कहें तो एकदम चकाचक बनाने की तैयारी हो रही थी। यह सारी तैयारी पड़ोसी देश से आ रहे खास मेहमान के लिए थी। खास मेहमान थे शी जिनपिंग, चीन के राष्ट्रपति। उनसे पहले 1996 में आए थे जियांग जेमिन दोनों राष्ट्रपतियों के नेपाल आने के बीच 23 साल का फासला रहा। इसके पीछे…
माला क्या होती है? सीधा और सरल जवाब है- एक अलंकारिक वस्तु, जो फूलों से या अन्य चीजों मसलन पत्ती, कागज आदि से बनायी जाती है। यूं तो मालाएं कई प्रकार की होती हैं; जैसे फूलों की, रत्नों की, बीजों की एवं धातुओं की आदि। लेकिन मोतियों की माला का एक पौधा होते हैं, जिसे अंग्रेजी में स्ट्रिंग ऑफ प्लर्स कहते हैं जो अपने नाम के अनुरूप लगभग गोलाकार, छोटे मटर के आकार के पत्तों द्वारा आसानी से पहचाने जा सकते हैं। पत्तियों के तने पर उगते हैं, जो सुंदर ढंग से प्लांटर्स और हैंगिंग बास्केट के ऊपर फैल जाते…
ओरेकल के कुछ कर्मचारियों के लिए काम का दिन एक ऐसे ईमेल के साथ शुरू हुआ, जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद नहीं की थी। संदेश में बताया गया कि संगठन में व्यापक बदलाव के तहत उनकी भूमिका खत्म की जा रही है और उसी दिन उनका आखिरी कार्यदिवस है। कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि जल्द ही उनके कंप्यूटर, ईमेल, संदेश और कंपनी की फाइलों तक पहुंच बंद कर दी जाएगी।मौजूद जानकारी के अनुसार, ताजा छंटनी में कितने कर्मचारी प्रभावित हुए हैं, इसकी आधिकारिक संख्या ओरेकल ने जारी नहीं की है। कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में उनकी व्यक्तिगत नौकरी…
पॉवरफुल की क्या परिभाषा हो सकती है, ठेठ देशी अंदाज में समझें तो उसका घर भी अच्छे से चले और पूरे मौहल्ले में भी भौकाल हो। यही बात देशों पर भी लागू होती है। भारत की हमेशा से ये चाह रही है कि उसे दक्षिण एशिया में इज्जत मिले। उसे एक पॉवरफुल कंट्री की तरह देखा जाए। उसकी ये इच्छा उसकी विदेश नीति की दिशा तय करती है। भारत का पड़ोसी मुल्क श्रीलंका के रिश्ते कैसे हैं इसके लिए अलग से एक तह तक का पूरा एपिसोड करना पड़ जाएगा। लेकिन संक्षेप में समझें तो तमिलनाडु से जाफरा मोटरबोट से…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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