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नयी दिल्ली, पांच सितंबर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि बौद्धिक स्वतंत्रता मजबूत होने के साथ भारत आज “आत्मविश्वास से भरा और बेझिझक” है तथा अपनी विरासत के अध्ययन के लिए अब किसी…
(तस्वीरों के साथ) पटना, पांच सितंबर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और राज्य के 11 जिलों में 16 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। भारी बारिश के बीच शनिवार…
वाराणसी (उप्र), पांच सितंबर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि राज्य में 10 वर्ष पहले 45 जिले बाढ़ से प्रभावित होते थे, लेकिन अब इस बात से संतुष्टि है कि सिर्फ…
करीमनगर में एक जनसभा में जाते समय BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव की कार को एक लॉरी ने…
तिरुवनंतपुरम, पांच सितंबर केरलम में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने तिरुवनंतपुरम जिले के चिरायिनकीझु में विधायक रम्या हरिदास और पार्टी के स्थानीय…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली मेट्रो से श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) की शताब्दी (100 साल पूरे…
(फाइल फोटो सहित) बेंगलुरु, पांच सितंबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शनिवार को कहा कि राज्य के शिक्षक समाज…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को कहा कि अमेरिका ईरान के ‘पिकएक्स माउंटेन’ नाम के बेहद सुरक्षित…
नयी दिल्ली, पांच सितंबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तेलंगाना में वन मंत्री कोंडा सुरेखा को मंत्रिपरिषद से हटाए जाने…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार शाम 7 बजे दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी…
पटना, पांच सितंबर बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 11 जिलों में करीब 10.26 लाख…
शनिवार को दिल्ली और गुरुग्राम में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ, जिससे कई सड़कें जलमग्न हो गईं और ट्रैफिक…
नयी दिल्ली, चार सितंबर हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी भड़काऊ पोस्ट, राजनीतिक लोगों से करीबी दिखाने और उकसाने वाले…
त्रिशूर (केरलम), पांच सितंबर केरलम के त्रिशूर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-66 पर एक कार के सड़क किनारे “अवैध रूप से”…
गुरुग्राम, पांच सितंबर हरियाणा के गुरुग्राम में पुलिस ने नया गांव में पड़ोसी के घर से लाखों रुपये के गहने…
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विश्वभर में लगभग सभी महापुरूषों ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता की संज्ञा दी है। गुरू रूपी इन्हीं शिक्षकों को सम्मान देने के लिए प्रतिवर्ष 5 सितम्बर…
इगा स्वियाटेक ने टोरंटो में अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए क्वार्टर फाइनल में डायना श्नाइडर…
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ यूरोप, एशिया और…
आर्सेनल के युवा खिलाड़ी माइल्स लुईस-स्केली को लेकर स्थानांतरण बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो…
बार्सिलोना से लिवरपूल पहुंचे रोनाल्ड अराउजो इस नए सफर को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।…
पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने 2005 में दिल्ली में भारत और श्रीलंका के बीच खेले गए…
पाकिस्तान की एकदिवसीय टीम की कप्तानी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में…
सलमान खान के बहुप्रतीक्षित रियलिटी शो ‘Bigg Boss 20’ का इंतजार आखिरकार खत्म हो रहा है। शो का धमाकेदार प्रीमियर कल (6 सितंबर) होने जा रहा है। यह सीज़न Colors TV पर प्रसारित होने के साथ-साथ Jio Hotstar पर स्ट्रीम किया जाएगा। इस बार मेकर्स ने इंटरनेशनल फैंस का ध्यान रखते हुए UK, कनाडा और सिंगापुर में भी 24×7 लाइव फ़ीड और प्रीमियर एक्सेस देने का फैसला किया है।लाइनअप की बात करें तो, पहले ईशा रिक्खी, अमन गांधी, आम्रपाली दुबे, कुशल तंवर (जिन्हें गुल्लू के नाम से भी जाना जाता है), खुशी दुबे और शोविक चक्रवर्ती जैसे नामों के शामिल होने की अटकलें थीं। हालाँकि, मेकर्स ने अब आधिकारिक तौर पर Bigg Boss 20 के लिए दो कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की पहचान का खुलासा कर दिया है।Bigg Boss 20 के लिए दो कन्फर्म कंटेस्टेंट्सBigg Boss 20 के मेकर्स ने आधिकारिक Colors TV इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से दो कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की…
New Delhi: Hot and humid conditions prevailing during India’s monsoon season could extend the duration of uncompensable heat stress of…
भागदौड़ भारी जिंदगी में क्या आप भी रोजाना थकान महसूस करते हैं। बातों को भूल जाना या मेंटली ड्रेन फील…
गर्मी में पसीना आना और थकान महसूस होना एक आम बात होती है। लेकिन कुछ लोगों को कम गर्मी में…
सितंबर का महीना घूमने के लिहाज से बेहद खास होता है क्योंकि इस महीने में न ज्यादा गर्मी…
Hindi NewsCareerIIT Dhanbad Alumni Abhijeet Anand Success Story | AbCoffee Startup Journeyकुछ ही क्षण पहलेकॉपी लिंकअभिजीत आनंद ने IIT धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में पढ़ाई की। उसके बाद करीब साढ़े 8 साल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। 2021 में भारत लौटने के बाद उन्होंने 20 शहरों और 12 राज्यों में जाकर करीब 10,000 लोगों, कैफे के मालिकों और किसानों से बात कर कॉफी मार्केट को समझा।इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर 2022 में abCoffee शुरू किया। उनका पहला आउटलेट जून 2022 में मुंबई के वर्सोवा में खुला। इस काम में शुरुआती खर्च करीब 13 लाख रुपए था जो उन्होंने अपनी बचत…
मुंबई, पांच सितंबर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कांदिवली पूर्व के ठाकुर विलेज में कौशल…
नयी दिल्ली, चार सितंबर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को करीब 30,000 करोड़ रुपये के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के…
शुक्रवार को तार और केबल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह आदित्य बिड़ला समूह…
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की पूंजी निकासी और कच्चे तेल की आपूर्ति में लगातार व्यवधानों के चलते शुक्रवार को शुरुआती…
भारत और कनाडा सीमापार धन भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे कनाडा…
उत्तर प्रदेश की राजनीति को भारतीय लोकतंत्र का हृदयस्थल माना जाता है। दिल्ली की गद्दी का रास्ता लखनऊ के गलियारों से होकर गुजरता है, यही कारण है कि देश के इस सबसे बड़े सूबे में होने वाली हर छोटी-बड़ी राजनीतिक हलचल का असर राष्ट्रीय फलक पर साफ दिखाई देता है। वर्ष 2026 की समाप्ति के करीब आते ही और 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच शह-मात का खेल पूरी तरह से शुरू हो चुका है। लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों ने सूबे की राजनीतिक जमीन को जो नई शक्ल दी थी, उसके बाद हर दल अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटा है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार तीसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होकर इतिहास रचने की कवायद में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के सहारे दस…
उत्तरप्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे लंबे और निर्णायक अध्यायों में से एक रहा है। इस मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति की दिशा बदली, भाजपा को राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अंततः 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक लक्ष्य पूरा हुआ।लेकिन इतिहास का दिलचस्प मोड़ यह है कि मंदिर बनने के बाद असली प्रशासनिक चुनौती शुरू हुई है, जिसके दृष्टिगत 2 सितंबर 2026 को “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट” ने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को अपना पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त किया। इसलिए मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे महत्वपूर्ण प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझना होगा।इसे भी पढ़ें: Operation Sindoor से अयोध्या तक: कौन है राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा, क्या होगी जिम्मेदारीमसलन, लगभग 5,585 आवेदनों में से बहुस्तरीय चयन…
पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद RC (Registration Certificate) अपने नाम ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है। अब केंद्र सरकार ने वाहन के मालिकाना हक के ट्रांसफर और अधिकृत डीलरों के जरिए पुराने वाहनों की बिक्री को लेकर नए नियमों का मसौदा पेश किया है। इसमें छह महीने की समय सीमा का प्रावधान चर्चा में है। हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि छह महीने बाद मालिकाना हक बदलने का प्रस्ताव आम व्यक्ति द्वारा खरीदे गए वाहन पर सीधे लागू होने वाला नियम नहीं है। यह मुख्य रूप से उस वाहन के लिए प्रस्तावित है, जिसे पंजीकृत मालिक ने अधिकृत डीलर को सौंप दिया है और Form 29C के जरिए इसकी सूचना दी गई है। क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य खासकर संगठित सेकंड-हैंड वाहन कारोबार में वाहन के एक डीलर से…
पश्चिम बंगाल का जादवपुर विश्वविद्यालय एक समय देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता था, लेकिन आज कैंपस से ज्ञान, शोध और अकादमिक विमर्श की बजाय ‘आजादी’ के नारे और विवादित राजनीतिक गतिविधियों की खबरें सुर्खियां बन रही हैं। यहां सवाल उस मानसिकता का है जो भारत में रहते हुए भारत से ही ‘आजादी’ की मांग करने तक पहुंच जाती है। देखा जाए तो ‘कश्मीर मांगे आजादी’ जैसे उद्घोष और माओवादी नेता किशनजी के समर्थन में लिखे नारों ने एक बेहद असहज सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर विश्वविद्यालय के भीतर किस तरह की राजनीति और किस तरह की मानसिकता को जगह दी जा रही है? ऐसे लोगों को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का रुख बिल्कुल स्पष्ट और सख्त है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा है कि वे इस ‘बीमारी’ को जानते हैं और इसकी ‘दवा और इलाज’ भी जानते हैं। इसे भी पढ़ें: Suvendu Adhikari…
नेपाल में ग्लेशियर ढहने से आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ हिमालय की नाजुक भौगोलिक संरचना को उजागर नहीं किया है, बल्कि भारत की सीमा से सटे तिब्बत में चीन के निर्माणाधीन 60,000 मेगावाट के मेदोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर भी खतरे की घंटी तेज कर दी है। नेपाल में सैंकड़ों लोगों की मौत और 750 लोगों के लापता होने की खबरों के बीच अब यह सवाल और गंभीर हो गया है कि दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक हिमालय में इतना विशाल बांध आखिर कितना सुरक्षित है।हम आपको बता दें कि शुरुआत में नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई इस आपदा को 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़कर देखा गया था। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के नए विश्लेषण ने तस्वीर बदल दी। यूएसजीएस के अनुसार, अतिरिक्त भूकंपीय आंकड़ों और उपग्रह तस्वीरों के अध्ययन से पता चला कि यह भूकंप नहीं था, बल्कि ग्लेशियर के ढहने और उसके…
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY सरकार का हेल्थकेयर प्रोग्राम है जो हर परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देता है, जो एम्पैनल्ड सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में होता है।आयुष्मान कार्ड क्या है?आयुष्मान कार्ड एक डिजिटल हेल्थ कार्ड है जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PMJAY) के तहत जारी किया जाता है। योग्य लाभार्थी आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल करके पूरे भारत में पैनल वाले अस्पतालों में हर परिवार को हर साल ₹5 लाख तक के कैशलेस इलाज का फ़ायदा उठा सकते हैं। यह कार्ड सभी योग्य लाभार्थियों के लिए सस्ती और आसानी से मिलने वाली हेल्थकेयर पक्का करता है और सेकेंडरी और टर्शियरी केयर हॉस्पिटलाइज़ेशन तक पहुँच देता है।इसे भी पढ़ें: Credit Card Closure: क्या आपने लंबे समय तक क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया? तो जानिए कैसे हो सकता है आपका नुकसान?आयुष्मान कार्ड की एलिजिबिलिटीPM-JAY के लिए एलिजिबल होने के…
आये दिन होने वाले प्रदर्शनों के चलते सामान्य जनजीवन को बंधक बना देने की प्रवृति पर दिल्ली उच्च न्यायालय की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है कि प्रदर्शनों के कारण कई बार तो जीवन मरण तक के हालात पैदा हो जाते हैं। अन्य सब कारणों और परिणामों को थोड़ी देर के लिए अलग कर भी दिया जाएं तो भी हालात यहां तक हो जाते हैं कि यातायात प्रभावित होने से तत्काल मेडिकल रिलिफ की आवश्यकता वाले बीमारों तक का जीवन संकट में पड़ जाता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि लोकतंत्र में अपनी बात कहने, अपनी बात रखने और अपना विरोध अंकित कराने का सबको अधिकार है। केई गलत हो रहा है तो उसका विरोध भी होना चाहिए पर इसका मतलब यह तो नहीं होना चाहिए कि हम अपनी बात कहने के चक्कर में दूसरों को अपने सामान्य नागरिक अधिकारों से वंचित कर दें। विरोध प्रदर्शन के साथ ही…
वन्देमातरम आज विवाद का विषय बना दिया है। जबकि यह सत्य है कि जब बंकिम बाबू ने इसकी रचना की थी, तब उनके मन में किसी के मन को आहत करने का कोई विचार नहीं था। उनका भाव केवल मातृभूमि के वंदन का था। देश में वन्देमातरम के अंतिम दो भाग का पहली बार विरोध विभाजन की मानसिकता रखने वाले मोहम्मद अली जिन्ना ने किया। आज उसी मार्ग पर कांग्रेस कदम बढ़ाती दिख रही है। यह बात सही है कि देश का सम्मान करने वाली किसी भी बात पर राजनीति नहीं होना चाहिए, लेकिन केवल वोट की चाहत के चलते ऐसा करना और भी खतरनाक हो जाता है।वन्दे मातरम् भारत की स्वतंत्रता चेतना, मातृभूमि के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय स्वाभिमान का ऐसा उद्घोष है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में असंख्य भारतीयों के भीतर देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की। यही कारण है कि आज जब वन्दे मातरम् के पूर्ण या…
भले ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अपनी-अपनी बिसात बिछाने में जुटी हों, लेकिन भारतीय राजनीति की इस शतरंज पर जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक और बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ चलने की संभावना जोर पकड़ रही है। हम आपको बता दें कि ‘एक देश, एक चुनाव’ का विचार अब महज बहस या चुनावी नारा नहीं रह गया है, भारत इसके क्रियान्वयन से कुछ ही कदम दूर दिखाई दे रहा है। एक ओर भाजपा देशभर में विभिन्न सामाजिक और पेशेवर वर्गों के बीच इस विचार के समर्थन में अभियान चलाकर जनमत तैयार करने में जुटी है, वहीं इस मुद्दे पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति भी राज्यों, विधायिकाओं, शिक्षाविदों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने के चरण में पहुंच रही है। ऐसे में सियासी हलकों में यह सवाल तेजी से उठ रहा…
नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन स्थल “जंतर-मंतर” (वोट क्लब के बाद) पर 21 अगस्त 2026 को हुआ ‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन वास्तव में आरक्षण सुधार मुहिम बनकर रह गया। हालांकि इसके सामाजिक मिजाज और जनहितकारी तेवरों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति के लिए महज एक और धरना नहीं है, बल्कि यह उस असंतोष की राजनीतिक अभिव्यक्ति है जो सरकारी नौकरियों, प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में अवसरों को लेकर सामान्य वर्ग के एक प्रतिभाशाली हिस्से, खासकर जेन-जी युवाओं में दिखाई दे रहा है। साथ ही प्रौढ़ और बुजुर्ग समाजसेवियों का समर्थन भी उन्हें प्राप्त है। इसलिए जंतर-मंतर की सियासी झाड़फूंक पर गौर फरमाना आवश्यक है, क्योंकि संविधान, राजनीति और सामाजिक न्याय की असली परीक्षा यहीं से शुरू होती है जो कब खत्म होगी, शायद नेताओं को भी नहीं पता, क्योंकि दो नावों की सवारी करने में वे माहिर जो होते हैं। कहना न होगा कि जिस तरह…
Supporting Student Journalist.
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