तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के क्यिरोंग में भयानक बाढ़ से हुई जान-माल की भारी तबाही पर दुख जताया और बार-बार होने वाली ऐसी आपदाओं के मूल कारणों से निपटने के उपाय करने का आह्वान किया। दलाई लामा ने कहा कि मुझे नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के क्यिरोंग में आई भयानक बाढ़ के बारे में जानकर दुख हुआ है, जिसमें लोगों की जान गई और भारी नुकसान हुआ।
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उन्होंने जान गंवाने वालों के लिए प्रार्थना की और पीड़ित परिवारों तथा बाढ़ से प्रभावित अन्य लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। दलाई लामा ने इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के इतिहास का भी ज़िक्र किया और कहा कि बार-बार आने वाली ये आपदाएं पर्यावरण से जुड़ी गहरी समस्याओं या अन्य छिपे हुए कारणों का संकेत हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि इस क्षेत्र ने पहले भी आपदाएं देखी हैं, इसलिए ये निश्चित रूप से किसी गहरे कारण का संकेत हैं – चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो या कोई अन्य कारक। उन्होंने भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए जहां भी संभव हो, उचित कदम उठाने का आह्वान किया।
नेपाल के रसुवा इलाके और नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास के इलाकों में बाढ़ से भारी तबाही के बाद बचाव और राहत का काम जारी है, और इसी दौरान उनके ये बयान आए। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, अचानक आई इस बाढ़ में कम से कम 165 लोगों की मौत हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं।
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बुधवार को हिमालय में बर्फ और चट्टानें गिरने से पानी, कीचड़ और मलबे का भारी सैलाब ल्हेंडे नदी में आ गया, जिससे बाढ़ आ गई। यह नदी भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में मिलती है। अचानक आए इस सैलाब ने नेपाल-चीन बॉर्डर के पास की बस्तियों और मुख्य परिवहन मार्गों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे घर, सड़कें और पुल नष्ट हो गए। लगभग 40 किलोमीटर सड़कें और दर्जनों पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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