रूस से जुड़ी बड़ी कारोबारी खबर सामने आई है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्विट्जरलैंड की खाद्य कंपनी नेस्ले और फ्रांस की खुदरा कंपनी औशान की रूस में मौजूद संपत्तियों को अस्थायी प्रबंधन के तहत रखने का आदेश दिया है। यह फैसला राष्ट्रपति के एक आदेश के जरिए लिया गया है। इन कंपनियों की रूस में स्थानीय इकाइयों का प्रबंधन अब रूसी कंपनी एल.ई.वी. मैनेजमेंट के पास रहेगा।
इस फैसले का असर नेस्ले रूस और नेस्ले क्यूबान नाम की दो इकाइयों पर पड़ा है। इन कंपनियों में नेस्ले की स्विस और जर्मन इकाइयों के पास मौजूद हिस्सेदारी को भी अस्थायी प्रबंधन में रखा गया है। वहीं, औशान की रूस स्थित इकाई को भी इसी व्यवस्था के तहत लाया गया है। आदेश में फ्रांसीसी लॉजिस्टिक कंपनी एफएम लॉजिस्टिक्स और पहले लेरॉय मर्लिन के नाम से चल रहे कारोबार, जिसे अब लेमाना प्रो के नाम से जाना जाता है, से जुड़ी संपत्तियां भी शामिल हैं।
नेस्ले ने शुक्रवार को कहा कि उसने रूस के फैसले का संज्ञान लिया है और अब स्थिति तथा आगे के विकल्पों का आकलन कर रही है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी और कारोबार की निरंतरता बनाए रखने की कोशिश करेगी। कंपनी ने खास तौर पर अपने कर्मचारियों के हितों पर ध्यान देने की बात कही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नेस्ले के रूस में छह उत्पादन केंद्र हैं और वहां करीब 7,000 कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े सैन्य हमले के बाद वहां अपने कारोबार को काफी सीमित कर दिया था। उसने निवेश रोक दिया और कई उत्पादों की बिक्री बंद कर दी, लेकिन जरूरी खाद्य सामान का उत्पादन जारी रखा था। इनमें कॉफी, मिठाई, बच्चों के लिए खाद्य सामग्री और पालतू जानवरों का खाना शामिल हैं।
दूसरी ओर, औशान ने 2022 के बाद भी रूस में अपना कारोबार जारी रखा। वर्ष 2023 में उसने अपनी रूसी इकाई का प्रबंधन स्थानीय स्तर पर कर दिया था। शुक्रवार को औशान की रूसी इकाई ने बताया कि उसके स्टोर सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं और कंपनी ने नए आदेश को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
गौरतलब है कि रूस ने 2023 में ऐसा कानूनी रास्ता तैयार किया था, जिसके तहत उन देशों की कंपनियों की संपत्तियों को अस्थायी प्रबंधन में रखा जा सकता है जिन्हें मॉस्को रूस के लिए मित्रवत नहीं मानता। इससे पहले डैनोन और कार्ल्सबर्ग जैसी पश्चिमी कंपनियों के रूसी कारोबार भी इसी तरह की कार्रवाई की चपेट में आ चुके हैं। कई मामलों में बाद में इन कारोबारों को रूसी खरीदारों को बेच दिया गया। हालांकि, मौजूदा आदेश में अभी स्वामित्व बदलने की घोषणा नहीं हुई है।
इस फैसले से पहले रूसी कंपनी केएस लॉजिस्टिका की ओर से नेस्ले की रूसी संपत्तियों को अस्थायी प्रबंधन में रखने का अनुरोध किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। उस समय नेस्ले ने कहा था कि रूसी अधिकारियों ने उससे इस अनुरोध को लेकर संपर्क नहीं किया था। अब राष्ट्रपति के आदेश के बाद कंपनी अपने अगले कदम का आकलन कर रही है।
बता दें कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध के बाद से कारोबारी संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। ऐसे में नेस्ले और औशान की रूसी संपत्तियों पर यह फैसला विदेशी कंपनियों के लिए वहां कारोबार जारी रखने से जुड़ी अनिश्चितता को और बढ़ाने वाला है।
