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सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
(अजय मसंद) नागोया (जापान), 20 सितंबर इलावेनिल वलारिवन की मुस्कान कभी उनके गले में पड़े पदक के रंग पर निर्भर नहीं करती। रविवार को भी जब उनके हाथ से लगभग पक्का लग रहा स्वर्ण पदक फिसल गया तब यह 27 वर्षीय भारतीय एयर राइफल निशानेबाज एशियाई खेलों की रेंज से उसी सहज मुस्कान के साथ बाहर निकलीं- शांत, संयमित और आश्चर्यजनक रूप से संतुष्ट। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल फाइनल के अधिकांश हिस्से में इलावेनिल पूरी तरह नियंत्रण में नजर आईं।उन्होंने करीब 1.5 अंक की बढ़त बनाई और लंबे समय तक इसे बरकरार रखा। लेकिन अंत में उनके तीन…
You had a great workout yesterday. You pushed harder, lifted heavier, ran faster, and left the gym feeling like you had finally “done enough.” But today, getting out of bed feels like a workout of its own. With high-intensity workouts becoming increasingly popular, there is an undeniable appeal to pushing our limits. We start believing that the harder we train, the fitter we become. But can pushing yourself too far actually backfire?Also read | How much exercise does your heart need? Cardiologist shares the ideal weekly targetIn an interview with HT Lifestyle, Deepti Sharma, director at MultiFit Wellness, shared insights…
You finally get the promotion you’d been chasing for two years, and by the following week, the excitement has quietly evaporated, replaced by a flat, slightly confusing sense of now what. Nobody really warns you that crossing the finish line can feel more like a letdown than an actual celebration. That gap between the anticipated high and the actual reality tends to have its own reasons. In this edition of ‘The psychology of everyday life,’ HT Lifestyle spoke to Dr Chandni Tugnait, MD, psychotherapist, life alchemist, coach and healer, founder and director of Gateway of Healing, to decode the psychology…
असम के गोलाघाट जिले से एक संदिग्ध तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 30 ‘टोके गेको’ (छिपकली की प्रजाति) को मुक्त कराया गया है। वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने रविवार को यह जानकारी दी। बरुआ ने बताया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद मुक्त कराई गई छिपकलियों को वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।वन मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि 17 सितंबर को मिली एक जानकारी के आधार पर पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग के तहत आने वाले बोकाखात रेंज के कर्मियों ने दीमापुर सीमा शुल्क (निवारक) प्रभाग के अधिकारियों के…
बिजी लाइफस्टाइल के चलते पता नहीं चलता है कि घर से ऑफिस की भागदौड़ में कब दिन निकल जाता है, पता नहीं चलता। कई बार ऑफिस का तनाव, देर रात स्क्रीन के समाने काम करना और बढ़ता प्रदूषण हमारी स्किन को नुकसान पहुंचता है।ऐसे में आपकी मुलायम त्वचा कहीं खो जाती है। अपनी स्किन को सॉफ्ट बनाए रखने के लिए महिलाएं कई प्रयास करती हैं, लेकिन रोजाना रात को 8 से 10 स्टेप्स वाला लंबा ब्यूटी रूटीन फॉलो करना काफी मुश्किल हो जाता है। यदि आपके पास भी समय की कमी है और आप सही से स्किन केयर नहीं कर…
हरियाणा के सिरसा निवासी और पूर्व सैनिक लाल चंद गोदारा ने 85 साल की उम्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से परास्नातक की डिग्री हासिल की है और अब वह पीएचडी या कानून की पढ़ाई करना चाहते है। गोदारा ने 76 साल की उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू की थी। उनके पोते-पोतियों के सवालों ने उनमें अधूरी रह गई शिक्षा पूरी करने की इच्छा जगा दी थी।पांच साल बाद 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी की और अब परास्नातक की डिग्री भी हासिल कर ली। गोदारा के बेटे डॉ. साहिब राम गोदारा ने रविवार…
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्राओं के लिए छात्रावास की कमी को लेकर सरकार से सवाल किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर बड़े स्तर पर हुए दीप जलाने के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए पूछा कि सरकार के पास दीये जलाने के लिए पैसा है, तो छात्राओं के लिए छात्रावास बनाने के लिए क्यों नहीं।राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में हुए अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र किया। छात्रा ने उच्च शिक्षा के लिए इंदौर आने के बाद सुरक्षित और कम खर्च में रहने की परेशानी के…
हरियाणा के गुरुग्राम में एक पीजी पर छापेमारी के दौरान कथित देह व्यापार गिरोह का खुलासा हुआ और 13 पुरुषों तथा आठ महिलाओं को हिरासत में लिया गया। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। गुरुग्राम पुलिस और राज्य महिला आयोग की संयुक्त टीम ने सेक्टर-38 स्थित पीजी पर छापा मारा।यह कार्रवाई शहर के सफायर 90 मॉल में कथित अवैध गतिविधियों को लेकर कई स्पा सेंटरों पर छापेमारी के एक दिन बाद हुई। पुलिस ने बताया कि झारसा गांव निवासी साहिल और उसकी पत्नी को मामले में गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को बचाई गई एक लड़की से मिली जानकारी…
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालकाजी में एक इमारत के निवासियों के बीच हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि उसका भाई घायल हो गया। पुलिस ने यह रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना शनिवार मध्य रात्रि को हुई।पुलिस रात करीब 12 बजकर तीन मिनट पर कालकाजी में झगड़े की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला कि इमारत की भूतल और तीसरी मंजिल पर रहने वाले लोगों के बीच झड़प हुई थी। पुलिस ने बताया कि घायल भाइयों की पहचान मंजीत सिंह उर्फ बंटी…
(अजय मसंद) नागोया, 20 सितंबर एलावेनिल वलारिवन के महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने एशियाई खेलों की निशानेबाजी प्रतियोगिता के पहले दिन दो रजत पदक जीतकर अपने अभियान की बेहतरीन शुरुआत की। भारत की सबसे कुशल राइफल निशानेबाजों में से एक एलावेनिल ने टीम स्पर्धा में देश को रजत पदक दिलाने में मदद की और फिर व्यक्तिगत स्पर्धा में भी रजत पदक जीता। तमिलनाडु में जन्मी यह निशानेबाज फाइनल के अधिकतर समय तक स्वर्ण पदक जीतने की स्थिति में दिख रही थी लेकिन अंतिम क्षणों में जापान की हिनाता ताइची ने…
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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