PCOS और UTI दोनों ही महिलाओं के हेल्थ से जुड़ी अहम समस्याएं हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) ये दोनों समस्याएं एकदम अलग-अलग हैं। दरअसल, पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन के कारण होने वाली समस्या है, जबकि UTI एक बैक्टीरियल इंफेक्शन से होने वाली दिक्कत है। लेकिन PCOS से पीड़ित महिलाएं अक्सर UTI की समस्या से परेशान रहते हैं। जिसके चक्कर में कई बार कंफ्यूज नजर आती है कि पीसीओएस और UTI में क्या कनेक्शन है? आइए आपको इसमें अंतर बताते हैं।
PCOS और UTI के बीच क्या संबंध है?
PCOS की समस्या में हार्मोन असंतुलित होने और ब्लड शुगर बढ़ने की वजह से शरीर में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा अधिक हो जाता है, जिसके कारण महिलाओं को बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI) की परेशानी हो सकती है। साल 2023 में Journal of the Brazilian Medical Association में प्रकाशित एक रिसार्च में PCOS और UTI के बीच मजबूत संबंध सामने आया। स्टडी में यह भी पाया गया कि PCOS, हाइपरएंड्रोजेनिज्म, मोटापा, ग्लूकोज असंतुलन और खराब लिपिड प्रोफाइल से जूझ रहे मरीजों में UTI की गंभीरता के साथ मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याएं भी अधिक देखने को मिलीं।
इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड शुगर
पीसीओएस से पीड़ित महिलाएं में इंसुलिन रेजिस्टेंस पाया जाता है। इसका सीधा मतलब यही है कि शरीर इंसुलिन का सही तरह से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने लगता है। जब यूरिन में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। इसी कारण से पीसीओएस वाली महिलाओं में UTI का खतरा अधिक देखने को मिलता है। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि महिलाओं का वजन ज्यादा होता है और जिनमें असंतुलित इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है, जिनमें बार-बार यूटीआई देखने को मिलता है।
हार्मोनल असंतुलन
PCOS में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। जिसका असर वजाइनल फ्लोरा पर भी देखने को मिलता है। महिलाओं के शरीर में नेचुरल बैक्टीरिया बैलेंस खराब होता है तो इंफेक्शन होने की संभावना अधिक हो जाती है।
वजन बढ़ना और खराब लाइफस्टाइल
पीसीओएस में ज्यादातर मोटापा बढ़ने की शिकायत बेहद आम होती है। अधिक वजन और शारीरिक एक्टिविटी की कमी शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ा देते हैं, जिससे कमजोर होने लगती है। कमजोर इम्यून सिस्टम इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है, जिससे बार-बार UTI होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।
पानी कम पीना
ज्यादातर महिलाएं कम पानी पीती हैं, बिजी लाइफस्टाइल के कारण कई बार पानी पीने का समय नहीं होता है। जिससे शरीर टॉक्सिंस और बैक्टीरिया को शरीर से बाहर नहीं कर पाता है। दरअसल, पीसीओएस में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाए, तो यूटीआई का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
तनाव और नींद न आना
असल में PCOS केवल हार्मोनल बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार से मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित करती है। ज्यादा तनाव लेने से और नींद की कमी के कारण कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ जाते हैं, जिससे इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम शरीर को इंफेक्शन के प्रति अधिक सेंसिटिव कर देता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
