(तपन मोहंता)
रांची, नौ अक्टूबर विश्व में चौथे नंबर के खिलाड़ी धीरज बोम्मादेवरा लगातार दूसरे एशियाई खेलों से बिना किसी व्यक्तिगत पदक के लौटे हैं, लेकिन इस शीर्ष भारतीय रिकर्व तीरंदाज को इसका कोई अफसोस नहीं है और इसके बजाय वह अपने रिकॉर्ड क्वालीफाइंग स्कोर से प्रेरणा लेकर 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। धीरज एशियाई खेलों से ठीक एक सप्ताह पहले मैक्सिको में तीरंदाजी विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बने थे। लेकिन एशियाई खेलों में व्यक्तिगत पदक एक बार फिर उनके हाथ नहीं लगा, हालांकि उन्होंने मिश्रित और पुरुष टीम स्पर्धाओं दोनों में रजत पदक हासिल किए।
धीरज ने हैदराबाद से पीटीआई से कहा, ‘‘मुझे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर कभी पछतावा नहीं हुआ। क्वालीफाइंग राउंड में मैंने एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया। हमने टीम और मिश्रित टीम स्पर्धाओं में रजत पदक भी जीते।’’
धीरज आर्चरी प्रीमियर लीग में माइटी मराठाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
उनसे पहले, डोला बनर्जी एकमात्र भारतीय तीरंदाज थीं जिन्होंने 2007 में महिलाओं की रिकर्व श्रेणी में विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता था। एशियाई खेलों में क्वालीफाइंग राउंड में रिकॉर्ड 698 अंक बनाने वाले धीरज ने कहा, ‘‘व्यक्तिगत मुकाबले में जीत और हार का अंतर मामूली होता है। यह खेल का हिस्सा है।
इसने मुझे यह अहसास दिलाया है कि मुझे और अधिक मेहनत करने की जरूरत है। इस लिहाज से यह मेरे लिए और भारत के लिए अच्छा है, क्योंकि (व्यक्तिगत) कांस्य पदक भारत को मिला।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मुझे किसी तरह का मलाल नहीं है। हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा और इससे हमें ओलंपिक चक्र को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी आत्मविश्वास भी मिला।
मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि हमारे पास पदक भी हैं और आत्मविश्वास भी। हमने उन कमियों की पहचान कर ली है जिन्हें हमें दूर करना है।’’
धीरज ने कहा, ‘‘परिस्थितियां कैसी भी हों हमें उन कमियों पर काम करते रहना होगा। हमने उन चीजों की पहचान कर ली है जिन पर हमें काम करना है और ओलंपिक से पहले यह काफी महत्व रखता है।
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