भारतीय रुपया लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच रुपया गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 13 पैसे कमजोर होकर 96.88 के स्तर पर बंद हुई। वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और मजबूत डॉलर ने भी रुपये की परेशानी बढ़ाई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 96.71 के स्तर पर खुला था। कारोबार के दौरान यह 96.65 के ऊपरी स्तर तक गया, जबकि 96.79 के निचले स्तर को छुआ। आखिर में रुपया 96.88 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.75 पर बंद हुआ था।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर निवेशकों का जोखिम लेने से बचना रुपये के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले विकल्पों की ओर जा रहे हैं। इसके अलावा, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की महंगी कीमतें भी भारतीय रुपया पर लगातार दबाव बना रही हैं।
डॉलर की मजबूती को मापने वाला सूचकांक 102.40 पर पहुंच गया, जिसमें 0.16% की बढ़त दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, डॉलर का यह मजबूत रुख और कई महीनों के ऊंचे स्तर के आसपास बना रहना रुपये के लिए चुनौती पैदा कर रहा है।
दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 4.20% की तेजी के साथ 104.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और खाड़ी तथा होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों पर हमलों से तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये और देश के आयात खर्च पर पड़ता है।
हालांकि, निचले स्तरों पर रुपये को भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप से कुछ सहारा मिला। बाजार में इस बात पर नजर है कि केंद्रीय बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।
मीरा एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण रुपये का रुख कमजोर रह सकता है। उनके मुताबिक, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि, अक्टूबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम होने और रिजर्व बैंक के किसी भी हस्तक्षेप से रुपये को निचले स्तरों पर कुछ समर्थन मिल सकता है।
गौरतलब है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा था कि केंद्रीय बैंक रुपये को स्थिर रखने और उसकी उचित कीमत तय होने की प्रक्रिया में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रुपये में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होने दिया जाएगा।
उधर, घरेलू शेयर बाजार में भी गुरुवार को भारी गिरावट रही। सेंसेक्स 1,045.46 अंक टूटकर 71,593.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 371.25 अंक गिरकर 22,231.80 पर आ गया। इससे बाजार में जोखिम से बचने की भावना और मजबूत हुई।
बता दें कि बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 6,121.37 करोड़ रुपये की निकासी की थी। ऐसे में मजबूत डॉलर, महंगा तेल, विदेशी निवेश की निकासी और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रुपये के लिए आगे भी बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।
