पीसीओएस यानी कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम एक कॉमन लाइफस्टाइल कंडीशन है। जिससे लाखों महिलाएं हर रोज निपटती हैं। पीसीओएस के लक्षणों में पीरियड्स क्रैंप्स, अनियमित पीरियड्स, वेट बढ़ना, फेस पर बालों का बढ़ना और मिजाज में बदलाव आदि शामिल है। लेकिन PCOS को सही डाइट से मैनेज किया जा सकता है। इसके बढ़ते लक्षणों को रोकने के लिए अपनी डाइट में कुछ बदलाव करना जरूरी है।
बता दें कि पीसीओएस सबसे आम एंडोक्रिनोपैथी है। जोकि 15% से 18% महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। लेकिन डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इस बीमारी को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे क्विक और आसान डाइट टिप्स को फॉलो करके आप पीसीओएस को कंट्रोल कर सकती हैं।
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डाइट टिप्स
फल और सब्जियां
वेट लॉस और PCOS को मैनेज करने के लिए फल और सब्जियों का सेवन जरूरी है। हर दिन कम से कम पांच हिस्से सब्जियां या फल खाना जरूरी है। यह आपके शरीर को जरूरी फाइबर देता है। वहीं कम से कम 35-40 ग्राम हाई फाइबर डाइट जरूर लें।
प्रोटीन
पीसीओएस डाइट के लिए प्रोटीन भी एक बेहतरीन ऑप्शन है। आपकी डाइट में प्रोटीन जितना ज्यादा होगा, आपकी इंसुलिन सेंसिटिविटी और तृप्ति उतनी ज्यादा बेहतर होगी।
हेल्दी फैट
अपनी डाइट में वसा की मात्रा को सीमित करने की कोशिश करें। हेल्दी फैट के रूप में दैनिक कैलोरी का 30% से ज्यादा नहीं खाना चाहिए। सेचुरेटेड फैट को और <10 प्रतिशत कुल कैलोरी तक सीमित करना चाहिए।
ओमेगा-3 फैटी एसिड
एक्सपर्ट के मुताबिक PCOS रोगियों के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड सुपरफूड है। यह प्रजनन क्षमता में सुधार करते हैं, हार्मोन को कंट्रोल करता है और इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार करता है। साथ ही यह फेस के बालों के विकास को कम करने में सहायता करता है।
पीसीओएस से जूझ रहे लोगों को चीनी से परहेज करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि चीनी सूजन की वजह बनती है और शरीर में इंसुलिन लेवल को भी बढ़ा देती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
