देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कर्मचारियों की कुल संख्या में कमी देखी गई है। बैंक द्वारा जारी ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में बैंक के कार्यबल से 3,343 कर्मचारी कम हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारियों की संख्या में यह कमी बैंक के बही-खाते में हुई करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के विवरण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक के कुल कर्मचारियों की संख्या घटकर 2,11,178 रह गई है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 2,14,521 था। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि इस दौरान कर्मचारियों के बैंक छोड़ने की दर यानी एट्रिशन रेट 23.12 प्रतिशत रहा। बैंक के विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों की संख्या में अलग-अलग रुझान देखे गए हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 की समाप्ति तक बैंक में वरिष्ठ प्रबंधन कर्मियों की संख्या 247 से बढ़कर 262 हो गई। इसी तरह, मध्यम स्तर के कर्मचारियों की संख्या भी 9,159 से बढ़कर 10,411 पहुंच गई। हालांकि, गैर-पर्यवेक्षी (नॉन-सुपरवाइजरी) श्रेणी में बड़ी कटौती देखी गई है। इस स्तर पर कर्मचारियों की संख्या 1,70,950 थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक घटकर 1,62,797 रह गई है।
बैंक के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो 31 मार्च, 2025 तक एचडीएफसी बैंक का कुल बही-खाता 11.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 43,64,886 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल 39,10,199 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में बैंक का कुल ऋण 12 प्रतिशत बढ़कर 29,37,166 करोड़ रुपये हो गया, जबकि कुल जमा राशि में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 31,05,251 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन ने रिपोर्ट के माध्यम से बताया कि बैंक अब तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित और ग्राहकों पर केंद्रित होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे बैंक का परिचालन बदल रहा है, कर्मचारियों को भी उसी गति और कुशलता के साथ आगे बढ़ना होगा।
