एआई से जुड़े कारोबार में तेजी के बीच चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया ने शेयरों की बायबैक को लेकर बड़ा फैसला किया है। कंपनी ने अपनी शेयर बायबैक की मंजूरी में रिकॉर्ड 150 अरब डॉलर की बढ़ोतरी की है। यह राशि 2024 में एप्पल को मिली 110 अरब डॉलर की बायबैक मंजूरी से भी ज्यादा है। इस फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में करीब 2% की तेजी देखी गई है।
कैलिफोर्निया के सांता क्लारा स्थित एनवीडिया के शेयर शुक्रवार के बंद भाव तक इस साल 20% से ज्यादा चढ़ चुके हैं। इसके बावजूद कंपनी के शेयर का मौजूदा मूल्यांकन पिछले कई वर्षों की तुलना में कम स्तर पर है। एलएसईजी के आंकड़ों के मुताबिक, एनवीडिया के शेयर करीब 16.5 गुना अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई पर कारोबार कर रहे हैं। यह जनवरी 2015 के बाद का सबसे कम स्तर है। पिछले 15 वर्षों का औसत करीब 30 गुना रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नई मंजूरी के बाद एनवीडिया के पास कुल 235 अरब डॉलर तक के शेयरों की बायबैक की क्षमता होगी। कंपनी इसे वित्त वर्ष 2028 तक इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। एआई के प्रशिक्षण और उससे जुड़े कामों के लिए चिप और दूसरी तकनीकों की मांग बढ़ने से कंपनी की नकदी कमाई मजबूत बनी हुई है। इसी वजह से एनवीडिया कारोबार में निवेश के साथ शेयरधारकों को पूंजी लौटाने की क्षमता भी बनाए रखना चाहती है।
एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनसन हुआंग ने कहा है कि कंपनी की मजबूत नकदी कमाई उसे नई तकनीकों में निवेश करने और शेयरधारकों को पूंजी लौटाने, दोनों के लिए पर्याप्त क्षमता देती है। बता दें कि कंपनी ने मई में भी 80 अरब डॉलर की शेयर बायबैक की घोषणा की थी।
एनवीडिया की नई 150 अरब डॉलर की मंजूरी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एलएसईजी के आंकड़ों के अनुसार यह राशि एसएंडपी 500 में शामिल करीब 84% कंपनियों के कुल बाजार मूल्य से अधिक है। ऐसे समय में यह घोषणा हुई है जब कंपनियों की शेयर बायबैक की रफ्तार धीमी हुई है। जुलाई से 23 सितंबर तक शेयर बायबैक में करीब 50% की कमी दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि एनवीडिया के पास जुलाई तिमाही के अंत में 22.44 अरब डॉलर की नकदी और नकदी के बराबर संपत्तियां थीं। कंपनी ने पिछले महीने वित्त वर्ष 2028 के लिए करीब 70% राजस्व वृद्धि का अनुमान भी दिया था। इस अनुमान से उन निवेशकों को कुछ भरोसा मिला है जो लगातार तेज बढ़त के बाद एआई पर होने वाले भारी खर्च के लंबे समय तक जारी रहने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
