दिवाला न्यायाधिकरण एनसीएलटी ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा को अपनी संपत्तियां बेचने या हस्तांतरित करने से मंगलवार को रोक दिया। साथ ही उन्हें समूह की कंपनियों के कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े करीब 22,006 करोड़ रुपये के दावों का लगभग 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति देने वाले आदेश पर भी रोक लगा दी। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि पुनर्भुगतान योजना पर स्पष्ट बहुमत नहीं बना और इसलिए आदेश को प्रभावी नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि कंपनी अधिनियम की धारा 419(5) के तहत बहुमत का कोई स्पष्ट मत नहीं है, जिसे प्रभावी किया जा सके। इसलिए तीसरे सदस्य निलेश शर्मा, सदस्य (न्यायिक) का 25 अगस्त, 2026 का आदेश स्थगित किया जाता है।’’ न्यायाधिकरण ने चंद्रा को व्यक्तिगत गारंटर बताते हुए यह भी निर्देश दिया कि वह ‘‘प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी संपत्ति को हस्तांतरित नहीं करेंगे’’ और मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी किए। असहमत कर्जदाताओं की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
असहमत कर्जदाताओं में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, केनरा बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं। मेहता ने आगाह किया कि ऐसा नहीं होने पर मामले का ‘‘मूल आधार’’ खत्म हो सकता है। न्यायमूर्ति ग्रेवाल ने कहा कि न्यायाधिकरण चंद्रा और पुनर्भुगतान योजना का विरोध करने वाले कर्जदाताओं समेत सभी पक्षों की विस्तार से सुनवाई करेगा।
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चंद्रा के वकील द्वारा संक्षिप्त दलील रखने का अनुरोध किए जाने पर पीठ ने उनसे कहा, ‘‘हम विस्तार से सुनवाई करेंगे।’’ पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी। विवाद अब राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) तक भी पहुंच गया है, जहां असहमत कर्जदाताओं ने पुनर्भुगतान योजना को चुनौती दी है। कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की अध्यक्षता वाली एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने मेहता के अनुरोध पर मंगलवार को मामले की सुनवाई की।
सॉलिसिटर जनरल ने यह तय करने के लिए एक दिन का समय मांगा कि कर्जदाता अपील में आगे बढ़ना चाहते हैं या नहीं और कहा कि वह बुधवार को न्यायाधिकरण में वापस आएंगे। एनसीएलटी का ताजा आदेश चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही को लेकर न्यायाधिकरण में लंबे समय से चले आ रहे मतभेद के बाद आया है। एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज और तकनीकी सदस्य रीना सिन्हा पुरी वाली दो सदस्यीय पीठ ने सितंबर, 2025 में अलग-अलग फैसले दिए थे।
भारद्वाज ने पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी, जबकि पुरी ने दावों को स्वीकार करने और मतदान में अनियमितताओं का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला तीसरे सदस्य निलेश शर्मा के पास भेजा गया, जिन्होंने 25 अगस्त को कुछ विवादित दावों को बाहर रखने और पात्र कर्जदाताओं के बीच उनका हिस्सा फिर से आवंटित करने की शर्त पर पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी। तीसरे सदस्य के आदेश को पहले दिए गए अलग-अलग फैसलों के साथ पढ़ने पर स्पष्ट बहुमत नहीं बन पाया।
इस कारण मामले को फिर एनसीएलटी अध्यक्ष के पास भेजा गया और पांच सदस्यीय विशेष पीठ का गठन किया गया। विवाद एक ऐसी पुनर्भुगतान योजना को लेकर है, जिसके तहत चंद्रा को अपने समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों का महज 6.5 करोड़ रुपये में निपटान करने की अनुमति दी गई थी। यह उनकी कंपनियों द्वारा चूक किए गए 22,006 करोड़ रुपये के मुकाबले 99.9 प्रतिशत की कटौती है।
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दस बैंकों और कर्जदाताओं ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि एचडीएफसी बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और केनरा बैंक समेत असहमत कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे होने वाली वसूली बहुत कम होगी। असहमत कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम मताधिकार था।
वहीं चंद्रा ने कहा है कि व्यापक रूप से बताई जा रही 22,006 करोड़ रुपये की राशि वह रकम नहीं है, जो उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधार ली थी। इसमें एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए उनके द्वारा दी गई गारंटी से जुड़े दावे शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी से जुड़े दावों की राशि करीब 3,990 करोड़ रुपये बताई है और कहा है कि बड़ी राशि मूल रूप से कर्ज लेने वाली कंपनियों के खिलाफ दावों से संबंधित है।
एनसीएलटी ने पिछले सप्ताह निपटान की अनुमति देते हुए कहा था कि चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया आगे बढ़ाने से कर्जदाताओं को इससे भी कम वसूली हो सकती है। हालांकि, असहमत कर्जदाताओं ने चंद्रा की घोषित कुल संपत्ति की और जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गारंटी देने के लिए उनकी संपत्ति का विवरण एक प्रमुख आधार था।
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कर्जदाताओं के अनुसार, प्रमाणित आंकड़ों में 2018 में उनकी कुल संपत्ति करीब 40,600 करोड़ रुपये और 2017 में 45,900 करोड़ रुपये थी जबकि 2024 तक यह राशि काफी घट गई थी। चंद्रा कभी भारत के प्रमुख कारोबारी चेहरों में शामिल थे। उन्होंने टेलीविजन, पैकेजिंग, बुनियादी ढांचे और डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार खड़ा किया।
वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थन से राज्यसभा सदस्य भी निर्वाचित हुए थे। वर्ष 2018 में बुनियादी ढांचा वित्त कंपनी आईएलएंडएफएस के धराशायी होने के बाद पैदा हुए नकदी संकट के कारण उनका कारोबारी साम्राज्य काफी दबाव में आ गया। भारी कर्ज में डूबी एस्सेल समूह की कंपनियों को वित्तीय परिस्थितियां सख्त होने के साथ अपने दायित्वों के पुनर्वित्त में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
समूह का काफी कर्ज गिरवी रखे गए शेयर के एवज में लिया गया था। शेयर कीमतों में तेज गिरावट से कर्जदाताओं ने अतिरिक्त प्रतिभूति या गिरवी के तौर पर संपत्ति की मांग की और इसके बाद शेयर की और बिक्री करनी पड़ी, जिससे समूह पर दबाव और बढ़ गया। इसके बाद कुछ कारोबार बेच दिए गए जबकि अन्य दिवाला कार्यवाही में चले गए।
