लखनऊ में मोबाइल फोन की किस्त न चुकाने पर एक युवक को अगवा करके चार दिनों तक बंधक बनाने, उससे जबरन मजदूरी कराने तथा उसका खून निकालकर बेचने के आरोप में बृहस्पतिवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों ने युवक की मां द्वारा 14 सितंबर को दर्ज करायी गयी शिकायत के हवाले से यहां बताया कि उसके बेटे नवल कुमार ने किस्तों पर एक मोबाइल फोन खरीदा था लेकिन एक किस्त न चुका पाने पर आठ सितंबर को आरोपी अनिकेत सिंह उर्फ काका (26) और सुशांत शर्मा (31) उसे मोबाइल की दुकान पर ले जाने के बहाने अपने साथ ले गए।
सूत्रों ने बताया कि महिला का आरोप है कि उसके बेटे को करीब चार दिन तक बंधक बनाकर रखा गया, उससे मजदूरी कराई गई और उसके साथ मारपीट की गई, यहां तक कि उसका एक यूनिट खून निकालकर बेचा गया। सूत्रों ने बताया कि महिला का इल्जाम है कि आरोपियों ने किस्त के तौर पर उससे ऑनलाइन 2,799 रुपये भी लिए थे। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में निगोहां थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 143(3) (मानव तस्करी), 146 (गैर-कानूनी तरीके से जबरन मजदूरी करना), 127(3) (गलत तरीके से बंधक बनाना), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया और आरोपियों का पता लगाने के लिए पुलिस के तीन दल बनाये गये।
सूत्रों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी और अन्य सुबूतों और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर बृहस्पतिवार को आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तथा उन्हें अदालत में पेश किया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार करने की कोशिशें जारी हैं। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान सुशांत ने पुलिस को बताया कि वह लखनऊ में ‘टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज लिमिटेड’ में प्रबंधक के तौर पर काम करता था और उधार पर दिये गये उत्पादों की किस्तें वसूलता था।
सूत्रों के मुताबिक सुशांत ने पुलिस को बताया है कि कंपनी का ‘फील्ड एजेंट’ शुभम सिंह और अनिकेत भी किस्त वसूली का काम करते थे। पुलिस के अनुसार सुशांत ने माना कि उसने और उसके साथियों ने नवल को उसके गांव के बाहर से इसलिए अगवा किया था क्योंकि वे उसे किस्त न चुकाने पर सबक सिखाना चाहते थे। सूत्रों के मुताबिक सुशांत ने पूछताछ में बताया है कि नवल को उसके जान-पहचान वाले एक ‘चैरिटेबल ब्लड सेंटर’ ले जाया गया जहां उसकी मर्जी के बगैर एक यूनिट खून निकाला गया और बाद में दूसरे साथियों की मदद से उसे बेच दिया गया था।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद नवल को कथित तौर पर चार दिनों तक शुभम के घर पर रखा गया, उससे प्लास्टर तोड़ने का काम करवाया गया और आरोपियों ने उससे किस्त भी वसूल ली।
