नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने ‘वोट चोरी’ जुड़े मामले और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को संसद परिसर से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च शुरू किया और कुछ देर बाद उनका एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपेगा। इससे पहले, उन्होंने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में बैठकर ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर अपनी रणनीति पर मंथन किया। मार्च कर रहे नेताओं ने एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर ‘सेव डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र बचाओ) लिखा हुआ था।
उन्होंने ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे लगाए। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एम.ए. बेबी, भाकपा महासचिव डी. राजा, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और मोहिबुल्लाह नदवी, निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल और कई अन्य नेता मौजूद थे। विपक्षी गठबंधन का एक प्रतिनिधिमंडल रात आठ बजे राष्ट्रपति द्रौपदी से मुलाकात करेगा और अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपेगा।
राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम ए बेबी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव शामिल होंगे। शिवसेना (उबाठा) ने खरगे को पत्र लिखकर बताया कि महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनावों से संबंधित पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण उसका कोई प्रतिनिधि राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले विपक्षी प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हो सकेगा। हालांकि, पार्टी ने खरगे के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन और राहुल गांधी के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान को पूर्ण समर्थन देने की बात कही है।
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल में करीब 10 लोगों के शामिल होने की संभावना है। उनका कहना था कि बैठक में एजेंडा तय करने और एक ज्ञापन को अंतिम रूप देने के बाद उसे राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। तिवारी ने कहा कि ज्ञापन में बताया जाएगा कि किस तरह लोकतंत्र की हत्या की जा रही है और संविधान को बंधक बनाया जा रहा है।
विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए पहली बार दो अक्टूबर को अनुरोध भेजा था। इसके बाद राष्ट्रपति भवन ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे थे। गठबंधन ने पांच अक्टूबर को दोबारा अनुरोध भेजकर नेताओं के नाम दिए और सात, आठ या नौ अक्टूबर को मुलाकात के लिए समय मांगा था।
‘इंडिया’ गठबंधन ने पिछले सप्ताह एसआईआर के मुद्दे पर संयुक्त कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया था। इसके तहत विभिन्न स्थानों पर रैलियां आयोजित करने और ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकालने का फैसला किया गया था। विपक्षी दल पिछले चार दिनों से अलग-अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
