IIT रोपड़, पंजाब ने PhD स्टूडेंट्स के लिए एक मॉडल तैयार किया है। जिसमें स्टूडेंट्स को अब सालों तक लंबी थीसिस लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, इसके बजाय एक अपने ही प्रोडक्ट को बेचकर, उसका प्राफिट इंस्टीट्यूट को दिखाकर डिग्री हासिल कर सकते हैं। IIT रोपड़ इस नए तरीके को अपनाने वाला देश का पहला IIT बन गया है। प्रोडक्ट/स्टार्टअप-ड्रिवन PhD
IIT रोपड़ ने ‘प्रोडक्ट/स्टार्टअप-ड्रिवन PhD’ पाथवे की शुरुआत की है, यानी एक ऐसा मॉडल जिससे रिसर्च स्कॉलर्स को PhD की डिग्री हासिल करने के लिए सालों-साल बैठकर 200-300 पन्नों की लंबी और भारी-भरकम थीसिस लिखने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय स्टूडेंट्स इंडस्ट्रीज में होने वाले रोज के चैलेंजस से कैसे डील करते हैं और उसके लिए किस तरह का बिजनेस मॉडल या कहें स्टार्ट-अप खड़ा करते हैं उसके बेसिस पर उन्हें PhD की डिग्री मिल सकेगी। ये किसी भी IIT का अपने तरह का पहला और अनोख प्रोग्राम है।
क्या होता है स्टार्टअप-ड्रिवन इस नए मॉडल में कोई भी रिसर्चर को रिसर्च से उपयोगी प्रोडक्ट बनाने, पेटेंट हासिल करने या स्टार्टअप शुरू करने पर फोकस कर सकता है। इस स्टार्टअप-ड्रिवन का उद्देश्य रिसर्च को उद्योग और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है। जिससे असल में कोई बदलाव हो सके। अगर हम इसे एक उदाहरण से समझें तो, सप्लाई चेन की बर्बादी से कैसे बचा जाए। दरअसल दवा और फूड इंडस्ट्री में सामान के खराब होने या नकली प्रोडक्ट बाजार में आने से हर साल अरबों डॉलर का नुकसान होता था। वहीं टेंपरेचर में जरा सा बदलाव होने पर दवाएं बेकार हो जाती थीं। ऐसे में इन दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए इन कंपनियों ने IoT (Internet of Things) सेंसर्स और ब्लॉकचेन का इस्तेमाल किया। जिससे दवाओं की लाइव ट्रैकिंग हो सकी। जिससे कंपनियों को सामान का टेंपरेचर, उसकी ट्रेकिंग की सही जानकारी मिल सकी। मानसिक दबाव को खत्म करेगा नया मॉडल
IIT रोपड़ के प्रोफेसर के मुताबिक पुराने रिसर्च पेपर को पब्लिश करने का भारी दाबाव होता है, जिसमें कई बार डेटा में बदलाव या चोरी जैसे मामले भी सामने आते है। नया मॉडल इस मानसिक दबाव को खत्म करेगा और स्टूडेंट्स कुछ नया बनाने के लिए भी प्रेरित करेगा। चीनी मॉडल से सीख, BITS पिलानी में भी ऐसा मॉडल
चीन ने फरवरी 2026 में इसी मॉडल पर एक सिविल इंजीनियरिंग स्कॉलर को बिना थीसिस लिखे, ब्रिज-पाइलन (पुल के खंभे का नया डिजाइन) का प्रैक्टिकल प्रोडक्ट बनाने पर PhD की डिग्री दी थी। हालांकि ये डिग्री किसी खास परस्थिति में दी गई थी। भारत में ऐसा ही प्रोग्राम (WHILSP) BITS पिलानी में चलाया जा रहा है। ये नया मॉडल न सिर्फ भारत के रिसर्च कल्चर को बदलेगा, बल्कि हजारों स्कॉलर्स को सिर्फ मोटी-मोटी थीसिस लिखने की बजाय देश के लिए नए रोजगार और टेक्नोलॉजी बनाने के लिए भी प्रेरित करेगा। PhD 3 से 6 साल तक की हो सकती है
PhD किसी भी सबजेक्ट में शिक्षा की सर्वोच्च डिग्री है। इPhD करने का मुख्य उद्देश्य किसी खास विषय में गहराई से रिसर्च करना और उस क्षेत्र में नया ज्ञान या समाधान जोड़ना होता है। भारत में UGC यानी, यूनियन ग्रांट कमीशन के मुताबिक, PhD न्यूनतम 3 साल का होता है और ये अधिकतम 6 साल तक का हो सकता है। 3 साल में कोर्स वर्क शामिल होता है। 1 साल के बाद थीसिस लिखे जाते हैं। —————————— ये खबर भी पढ़ें.. CBSE स्कूलों में AI की पढ़ाई:कक्षा 3 से 8 तक नया कोर्स लागू; 9वीं से 12वीं के लिए 20 घंटे का मॉड्यूल लॉन्च केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बढ़ावा देने के लिए इस साल से कक्षा 3 से 8 तक कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और AI का नया कोर्स लागू किया है। पूरी खबर पढ़ें..
IIT रोपड़ ने बिना थीसिस वाला PhD प्रोग्राम लॉन्च किया:अब अपना स्टार्टअप मॉडल दिखाकर सीधे ले सकेंगे डिग्री
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
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सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
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