नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के प्रवर्तन ढांचे में जल्द महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। जीएसटी कानून को अपराधमुक्त बनाने की प्रक्रिया के तहत कर अधिकारियों से कर चोरी करने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लिया जा सकता है। सितंबर, 2025 में हुई जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में कर दरों को तर्कसंगत बनाने की दिशा में बड़े फैसले किए गए थे।
अब सात अक्टूबर को होने वाली 57वीं बैठक में प्रवर्तन प्रावधानों में बदलाव समेत नीतिगत सुधारों पर विचार किए जाने की संभावना है। केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली जीएसटी परिषद यदि प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो जीएसटी के प्रवर्तन में विभागीय स्तर पर गिरफ्तारी के बजाय न्यायिक निगरानी की व्यवस्था हो सकती है। गंभीर और जानबूझकर की गई कर धोखाधड़ी के मामलों में आपराधिक अभियोजन जारी रखा जा सकता है।
मौजूदा जीएसटी कानून के तहत आयुक्त स्तर के अधिकारियों को किसी व्यक्ति द्वारा कानून के तहत निर्दिष्ट अपराध किए जाने पर केंद्रीय या राज्य कर अधिकारी को उसे गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत करने का अधिकार है। गिरफ्तारी का अधिकार मुख्य रूप से गंभीर अपराधों तक सीमित है। इनमें फर्जी चालान जारी करना, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेना या उसका इस्तेमाल करना तथा कर वसूलने के बाद निर्धारित अवधि में उसे सरकार के पास जमा नहीं करना शामिल है।
कानून जमानती और गैर-जमानती अपराधों के बीच भी अंतर करता है। निर्दिष्ट श्रेणी के जिन अपराधों में कर राशि पांच करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाता है। इस सीमा से कम राशि वाले अपराध, कानूनी प्रावधानों के तहत, आम तौर पर असंज्ञेय और जमानती होते हैं।
जीएसटी की धारा 69 में जीएसटी अधिकारी को गिरफ्तारी करने का अधिकार दिया गया है। इसके तहत यदि आयुक्त के पास यह विश्वास करने का कारण है कि किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया है, तो वह आदेश के जरिये केंद्रीय कर के किसी अधिकारी को उस व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है। गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना होता है।
मौजूदा व्यवस्था में आयुक्त स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद जीएसटी अधिकारी कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए स्थानीय पुलिस और कुछ अन्य सरकारी एजेंसियों से सहायता ले सकते हैं। जीएसटी की गिरफ्तारी अधिकृत केंद्रीय या राज्य कर अधिकारी करते हैं, स्थानीय पुलिस नहीं। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद जमानत देने या आगे हिरासत में रखने का फैसला अदालत करती है।
मजिस्ट्रेट लागू आपराधिक प्रक्रिया कानून के तहत व्यक्ति को जमानत दे सकता है या न्यायिक हिरासत में भेज सकता है। वर्तमान में आपराधिक प्रक्रिया भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के तहत संचालित होती है। प्रस्तावित सुधारों को मंजूरी मिलने पर जीएसटी अधिकारियों के गिरफ्तारी करने के मौजूदा अधिकार में मूलभूत बदलाव हो सकता है।
मुख्य प्रस्ताव जीएसटी अधिकारियों से करदाताओं को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लेने और गिरफ्तारी के लिए न्यायिक मंजूरी अनिवार्य करने का है। केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 74,782 करोड़ रुपये के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी के मामलों का पता लगाया और 358 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा फर्जी और आधार कार्ड के दुरुपयोग से हासिल किए गए फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामलों में 60 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 58,773 करोड़ रुपये की आईटीसी धोखाधड़ी के मामलों में 178 लोगों को गिरफ्तार किया था। फर्जी पंजीकरण के मामलों में 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। वित्त वर्ष 2023-24 में केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 36,373 करोड़ रुपये की आईटीसी धोखाधड़ी का पता लगाया और 182 लोगों को गिरफ्तार किया।
वहीं, फर्जी पंजीकरण के मामलों में 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
