ऑटोमोबाइल सेक्टर में प्रदूषण घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के जारी प्रयासों के बीच टीवीएस मोटर कंपनी (TVS Motor) के मानद चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोमवार को स्पष्ट किया कि प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) ही एकमात्र रास्ता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय वाहन उद्योग को प्रौद्योगिकी-तटस्थ (Technology-Neutral) दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि पर्यावरण और देश पर पड़ने वाले कुल प्रभाव के आधार पर विभिन्न ईंधनों और तकनीकों का सही इस्तेमाल हो सके। श्रीनिवासन नई दिल्ली में आयोजित इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट (IFQM) संगोष्ठी 2026 से इतर मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
श्रीनिवासन ने गुणवत्ता प्रबंधन पर केंद्रित ‘आईएफक्यूएम संगोष्ठी 2026’ से इतर बातचीत में कहा, ‘‘हमें प्रौद्योगिकी के मामले में तटस्थ या निरपेक्ष रहना चाहिए और प्रदूषण, गुणवत्ता तथा पर्यावरण के लिहाज से देश पर इसके कुल प्रभाव को देखना चाहिए। इसलिए, ईवी ही एकमात्र समाधान नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि ईवी को उपभोक्ताओं की पसंद के आधार पर स्वाभाविक रूप से बढ़ने देना चाहिए। भारत में खासकर तिपहिया एवं दोपहिया वाहन क्षेत्र में ईवी का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
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पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के बारे में उन्होंने कहा कि इससे भारत को ईंधन आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है और अब तक वाहनों के प्रदर्शन पर इसका असर बहुत सीमित रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रदर्शन में गिरावट बहुत मामूली है। मुझे लगता है कि इससे हमें हतोत्साहित नहीं होना चाहिए। आखिर, पूरा ब्राजील एथनॉल पर ही चलता है।’’
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श्रीनिवासन ने कहा कि ई10 तक एथनॉल मिश्रण के मामले में उपभोक्ताओं को अलग-अलग ईंधन विकल्प देने की जरूरत नहीं है, लेकिन इससे अधिक मिश्रण स्तर होने पर विकल्प दिए जाने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने कहा कि एथनॉल की अधिक मात्रा से वाहन में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर असर पड़ने की चिंता इसकी वजह है।
श्रीनिवासन ने भारतीय कंपनियों से वैश्विक बाजार में विस्तार के लिए गुणवत्ता और उत्पादकता के अंतरराष्ट्रीय मानकों को हासिल करने और उनसे आगे निकलने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक विनिर्माण में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए ‘गुणवत्ता’ का पर्याय बनना होगा।
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