प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की। दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, अहम खनिजों, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। PM मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-यूएई संबंधों में “बड़ा बदलाव आया है” और अब दोनों पक्ष “अपनी महत्वाकांक्षाओं को और ऊंचे स्तर पर ले जा रहे हैं। PM मोदी ने कहा महामहिम शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलकर खुशी हुई। रक्षा, AI, अंतरिक्ष, अहम खनिजों, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में हमारी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
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उन्होंने कहा निवेश के रिश्तों से लेकर रणनीतिक ऊर्जा बुनियादी ढांचे और IMEC कनेक्टिविटी में नई संभावनाओं तक, आगे बहुत बड़ी संभावनाएं हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के बीच, भारत-UAE के मजबूत संबंध क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के समय में, भारत-UAE की मजबूत साझेदारी स्थिरता, समृद्धि और शांति का प्रतीक है।” विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी के महत्व को दोहराया, जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक, ऊर्जा और लोगों के बीच संबंधों पर आधारित है। दोनों नेताओं ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा को भी याद किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) में UAE की “सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी” की सराहना की। दोनों नेताओं ने भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स में मिले सकारात्मक नतीजों का स्वागत किया और साझा हितों और प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने तथा ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करने के लिए इस समूह के माध्यम से मिलकर काम करना जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
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बैठक के दौरान, नेताओं ने कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया। इसमें UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी का ओडिशा में एक इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट के विकास में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करने का ऐलान भी शामिल है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस प्रोजेक्ट को भारत का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड एल्युमीनियम निवेश बताया है और उम्मीद है कि इससे ओडिशा एक ग्लोबल एल्युमीनियम मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा। दोनों नेताओं ने UAE के सबसे नए सॉवरेन इन्वेस्टमेंट फंड, ‘L’Imad’ की भूमिका को भी माना, जो आपसी फायदे के लिए भारत-UAE साझेदारी को और मजबूत करने में मदद कर सकता है।
