नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने 20 जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) द्वारा बुलाए गए संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की परिस्थितियों की जांच के लिए एक नयी प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि जांच का मुख्य ध्यान हिंसा के पीछे किसी बड़ी साजिश पर होगा, जिसमें कथित उकसाने वालों की पहचान की जाएगी और यह जांच की जाएगी कि क्या यह हिंसा पूर्व नियोजित थी।
अपराध शाखा ने जंतर-मंतर पर कॉजपा के एक और प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से दो दिन पहले प्राथमिकी दर्ज की है। इस बार यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए किया जाएगा। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि 10 अक्टूबर को किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर नयी दिल्ली जिले के कई थानों में दर्ज 17 प्राथमिकी रद्द कर दी गई थीं। केंद्र के अनुरोध पर, शीर्ष अदालत ने हालांकि उस समय दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में मौजूद गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ नयी प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी थी। नयी प्राथमिकी के संबंध में पुलिस सूत्र ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अपराध शाखा की टीम इस बात की भी जांच करेंगी कि कॉजपा द्वारा 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के आह्वान के बाद क्या आपराधिक तत्व प्रदर्शन में घुस गए थे।
सूत्र ने कहा, पुलिस घटनाओं के क्रम को फिर से तैयार करेगी, (विरोध प्रदर्शन में) मौजूद लोगों की भूमिका निर्धारित करेगी और उपद्रव के पहले और इसके दौरान आदान-प्रदान किए गए संदेशों की जांच करेगी। आपराधिक साजिश, साझा मंशा, लोक सेवकों पर हमला, तोड़फोड़ और दंगे से संबंधित भारतीय न्याय संहिता के कई प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। अधिकारी ने कहा कि जांच में उन लोगों की पहचान करने पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा जिन्होंने कथित तौर पर हिंसा को भड़काया था।
सूत्र ने कहा, हम जांच करेंगे कि उनमें से प्रत्येक ने क्या भूमिका निभाई, क्या उन्हें विरोध में शामिल होने के लिए कहा गया था या उन्होंने स्वयं भाग लिया था, और क्या वे हिंसा में शामिल थे। पुलिस ने कहा कि उकसाने वालों की पहचान करने और हिंसा की वजह बनने वाली परिस्थितियों को स्थापित करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई है। कॉजपा के 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी और छात्र प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और सरकारी इमारतों को विकृत किया गया था।
सूत्र ने बताया कि पुलिस ने इन सभी घटनाओं का संज्ञान लिया है। अपराध शाखा उन 2,873 लोगों की भूमिका की भी जांच करेगी, जिनके बारे में पुलिस ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (चेहरा पहचानने वाली प्रणाली) के जरिए उनकी पहचान आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के रूप में की गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि उसका एफसीआर लगभग 50 प्रतिशत सटीक है।
दिल्ली में 20 जुलाई को कॉजपा के नेतृत्व वाले संसद चलो मार्च में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
