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बेंगलुरु, 16 सितंबर वर्ष 2024 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए बुधवार को चुने गये दिग्गज कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग ने कहा कि पुरस्कारों के चयन में ‘‘भाई-भतीजावाद’’ और ‘‘पक्षपात’’ का प्रभाव रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता की भागीदारी के साथ इस व्यवस्था में बदलाव किया। नाग ने कहा कि वह पुरस्कार की घोषणा करने के लिए मोदी के आभारी हैं और उन्होंने यह सम्मान कर्नाटक के लोगों को समर्पित किया। नाग ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘आप जानते हैं, इस पुरस्कार के चयन में भी भाई-भतीजावाद और पक्षपात जैसी चीजें थीं।
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बदल दिया।’’
उन्होंने कहा कि मोदी ने पद्म पुरस्कारों के लिए जनता से सुझाव मांगे थे, जिसके बाद कन्नड़ लोगों ने उनके नाम की सिफारिश की। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी ही ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने लोगों से अपने मन में मौजूद नामों की सिफारिश करने का आग्रह किया। यह पहली बार था, जब उन्होंने इसे जनता के सामने रखा।’’
नाग ने कहा कि उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने की उम्मीद नहीं थी और वह अब भी इस सम्मान को लेकर खुद को तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उम्मीद नहीं की थी कि मुझे यह फाल्के पुरस्कार दिया जाएगा। इसलिए मैं अभी इस सम्मान को स्वीकार करने की स्थिति में आने की कोशिश कर रहा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे कर्नाटक के लोगों को समर्पित करूंगा और इसके लिए हमारे प्रिय प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दूंगा, क्योंकि उन्होंने ट्वीट कर इस विशेष पुरस्कार की घोषणा की। मैं उनका आभारी हूं और इस देश का भी आभारी हूं, जिसने मुझे यह अवसर प्रदान किया।’’
पचास साल का अभिनय करियर पूरा कर चुके नाग ने कहा कि उन्होंने कभी पुरस्कारों की उम्मीद नहीं की, लेकिन वह अपने काम की सराहना करने वाले लोगों के समर्थन को महत्व देते हैं।
फिल्म उद्योग में कदम रखने वाले युवाओं के लिए उनकी सलाह पूछे जाने पर नाग ने कहा कि उन्हें कड़ी मेहनत करनी चाहिए और दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करना चाहिए। नाग ने कहा कि वह यात्रा करने को लेकर अनिच्छुक हैं और अभी यह तय नहीं किया है कि वह पुरस्कार समारोह में शामिल होंगे या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मुझे बुलाया जाता है, तो मैं मना नहीं कर सकता।
जब उन्होंने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया है, तो मुझे वहां जाकर इसे ग्रहण करना चाहिए।’’
नाग ने कहा कि यह सम्मान भारत के विभिन्न फिल्म उद्योगों और अलग-अलग भाषाओं में सिनेमा के प्रति देश के प्रेम का जश्न मनाने का एक अवसर है। पांच दशकों के फिल्मी सफर में 270 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता अनंत नाग (78) रंगमंच की दुनिया की भी जानी-मानी शख्सियत हैं। उन्हें भारतीय सिनेमा के इस सर्वोच्च सम्मान से 22 सितंबर को गुजरात के केवडिया में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में नवाजा जाएगा।
नाग का पालन-पोषण तटीय कर्नाटक के भटकल में एक धार्मिक परिवार में हुआ था और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए मुंबई भेजा गया। साहित्य और कहानी कहने की कला से शुरुआती जुड़ाव ने कला के प्रति उनकी रुचि को आकार दिया। मुंबई में रहते हुए वह धीरे-धीरे शहर के रंगमंच आंदोलन की ओर आकर्षित हुए।
नाग ने लगभग पांच वर्षों तक कोंकणी, हिंदी और मराठी नाटकों में अभिनय किया। इस दौरान वह सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसी रंगमंच की हस्तियों से प्रभावित हुए। उन्होंने 1973 में आई कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से सिनेमा में पदार्पण किया।
वह दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘मालगुडी डेज’ का हिस्सा थे, जिसका निर्देशन उनके फिल्मकार भाई शंकर नाग ने किया था।
