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- NEET PG Result Update | NBEMS Cut Off Policy & Zero Percentile Debate
8 मिनट पहलेलेखक: सृष्टि तिवारी
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24 सितंबर को जारी हुए NEET-PG 2026 रिजल्ट में इस बार कुल 2,63,535 कैंडिडेट्स ने क्वालिफाई किया है। लेकिन एग्जाम देने वाले 258 कैंडिडेट्स के 0 या उससे भी कम नंबर हैं। साथ ही लास्ट रैंक यानी 0 पर्सेंटाइल लाने वाले कैंडिडेट का स्कोर -59 है।
बीते 3 सालों का पैटर्न देखें तो 0 पर्सेंटाइल स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स को काउंसलिंग में मौका मिल सकता है। इससे एक बार फिर ये बहस तेज गई है कि क्या फिर 0 परसेंटाइल वाले कैंडिडेट्स को MD, MS करने का मौका दिया जाएगा?
कोविड-19 के बाद पहली बार घटाया गया था पर्सेंटाइल
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस यानी NBEMS ने साल 2023 में कोविड-19 के बाद पहली बार NEET-PG का क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल घटाकर 0 किया था। इससे बहुत कम या नेगेटिव स्कोर करने वाले कैंडिडेट्स भी काउंसलिंग के लिए एलिजिबल हो गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में कहा गया- इससे डॉक्टर्स की क्वालिटी गिरेगी
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG 2025-26 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल को कम करने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई की थी और कम परसेंटाइल को लेकर सरकार और NBEMS दोनों से ही जवाब मांगा था।
ये याचिका सोशल वर्कर हरिशरण देवगन, डॉ. सौरव कुमार, डॉ. लक्ष्य मित्तल और डॉ. आकाश सोनी ने लगाई थी। इस याचिका में 2025-26 की काउंसलिंग में दो राउंड के बाद NEET PG-2025 कट-ऑफ कम करने को लेकर सवाल किया गया था।
याचिका के मुताबिक, कट-ऑफ कम करना आर्टिकल 14 और आर्टिकल 21 का उल्लंघन था।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन ने किया था विरोध
देश में मेडिकल प्रोफेशनल्स के अधिकारों, कल्याण और गरिमा की वकालत करने वाला यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन (UDF) ने पिछले साल NEET PG का कट-ऑफ 0 पर्सेंटाइल किए जाने का कड़ा विरोध किया था।
UDFA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और अन्य पदाधिकारियों ने इस नोटिफिकेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की थी। UDF ने कहा था-
- बेहद कम या नेगेटिव स्कोर पाने वाले कैंडिडेट्स का पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल ट्रेनिंग (MD/MS) लेना पब्लिक हेल्थ के साथ बड़ा समझौता होगा।
- बार-बार एलिजिबिलिटी रूल कम करने से भविष्य में स्पेशलिस्ट डॉक्टर की क्वालिटी पर बुरा असर होगा।
- जब कम योग्यता वाले डॉक्टर हाई रिस्क वाले मेडिकल क्षेत्रों (जैसे सर्जरी या ऑर्थोपेडिक्स) में स्पेशलिस्ट बनेंगे, तो इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा।
- इससे ट्रेनिंग की खराब क्वालिटी, अच्छे फैकल्टी की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी असर होगा।
ये सीटें भरने का नहीं, बेचने का फॉर्मूला है- एकेडमिक एक्सपर्ट
एकेडमिक एक्सपर्ट और पंजाब सरकार के एकेडमिक प्रोग्राम का हिस्सा रहे कुणाल सिंह बताते हैं कि कट-ऑफ घटाकर 0 पर्सेंटाइल करना सीटें भरने का नहीं, बेचने का फॉर्मूला है।

कुणाल सिंह ने कहा, “सरकारी कॉलेज में सीट भी कम होती हैं, जरूरी नहीं कोई टॉप स्कोरर उसको अफोर्ड कर पाए। ऐसे में कम स्कोर वाला कोई कैंडिडेट मोटी रकम चुकाकर उसको खरीद सकता है और ये सीट पेड होने की वजह से ही भर पाती हैं।”
कुणाल बताते हैं कि ये खेल सिर्फ NEET-PG में नहीं है बल्कि NEET-UG में भी आपको इसके कई सारे उदाहरण मिल जाएंगे। वे कहते हैं ‘यदि सिर्फ पंजाब की ही मैं बात करूं तो यहां ऐसे कई कैंडिडेट्स होंगे जो MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन उनके NEET UG में 140 नंबर भी नहीं होंगे या कहूं वो 12वीं बोर्ड में सेकेंड डिवीजन भी नहीं आए होंगे।’ ये सब पेड सीट का खेल है इसका नुकसान बहुत बड़ा है।
तो क्या पासिंग क्राइटेरिया घटाने से वाकई खराब क्वालिटी के डॉक्टर्स तैयार होते हैं?
कट-ऑफ घटाने के फैसले को लेकर एक दूसरा तर्क भी है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रोफेसर के अनुसार-
- किसी खास स्पेशलाइजेशन के लिए एडमिशन के पर्सेंटाइल के डेटा का कोई खास मतलब नहीं होता है।
- साथ ही कम पर्सेंटाइल वाले कैंडिडेट्स, कम पसंद की जाने वाली सीटों पर एडमिशन लेते हैं।
- एडमिशन का मतलब ये नहीं होता है कि कैंडिडेट को MD, MS या DNB की डिग्री मिल जाएगी।
- किसी भी डिग्री के लिए कैंडिडेट को पढ़ाई करनी होती है और परीक्षा भी पास करनी होगी।
NBEMS की सफाई- सीटें भरना जरूरी
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद, NBEMS ने अपने पक्ष में कहा था कि देश भर में 18,000 से ज्यादा पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटें खाली हैं। इस वजह से बोर्ड ने NEET-PG 2025 एडमिशन के लिए क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल में बदलाव किया है।
दरअसल, 2025 में ही कटऑफ पर्सेंटाइल घटाने से -40 स्कोर करने वाले भी काउंसलिंग के तीसरे राउंड में शामिल हो गए थे।
दिल्ली हाईकोर्ट भी पर्सेंटाइल में दखल से कर चुका है इनकार
कट-ऑफ 0 पर्सेंटाइल करने के खिलाफ एक मामला जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट में भी आया था। इस मामले में संचित सेठ बनाम नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज अन्य का जिक्र करते हुए, कोर्ट ने योग्यता के क्राइटेरिया को कम करने के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि कट-ऑफ 0 पर्सेंटाइल करने को लेकर पब्लिक हेल्थ रिस्क और स्टैंडर्ड्स में गिरावट की जो बात कही जा रही है, वो ‘बेबुनियाद’ है।
पोस्ट-ग्रेजुएशन की खाली सीटों के लिए उम्मीदवारों की उपलब्धता को किसी सोच से जुड़ा नहीं माना जा सकता। तब कोर्ट ने माना कि ‘फैसला लेने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं थी, जिसके लिए चल रहे काउंसलिंग राउंड में न्यायिक दखल की जरूरत हो।’ हालांकि, एडमिशन देने वाली नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC का कहना था कि काउंसलिंग के दौरान ज्यादा रैंक वाले उम्मीदवारों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है।
देश में PG मेडिकल कोर्स के लिए 33,088 सरकारी सीटें
इस साल NEET PG 2026 काउंसलिंग में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों को बढ़ाया गया है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने NEET PG 2026-27 का जो सीट मैट्रिक्स जारी किया है, उसके मुताबिक 58,000 MD, MS और डिप्लोमा सीटें हैं, जो पिछले साल 52,173 थीं।
जबकि 2,73,096 कैंडिडेट्स ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन किया था। वहीं 2,65,980 कैंडिडेट्स ने ये परीक्षा दी थी। NMC 29 सितंबर 2026 के डेटा के मुताबिक, NEET-PG की कुल सीटों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 33,088, प्राइवेट कॉलेजों की 21,892 और डीम्ड यूनिवर्सिटी की 8,197 सीटें शामिल हैं।

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