अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने शुक्रवार को मानव तस्करी, ऑनलाइन शोषण, मादक पदार्थों के सेवन, बाल विवाह और सीमा पार की चुनौतियों समेत बच्चों के सामने उभर रहे खतरों से निपटने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के बीच क्षेत्रीय सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यहां दो दिवसीय ‘पूर्वोत्तर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (एनई एससीपीसीआर) सम्मेलन 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए खांडू ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के बाल अधिकार निकाय एक साझा मंच पर एकत्र हुए हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों का कल्याण सुशासन का वास्तविक पैमाना है। किसी भी सरकार की सफलता का आकलन केवल आर्थिक विकास या बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं किया जा सकता बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों की कितनी प्रभावी तरीके से सुरक्षा करती है। खांडू ने अरुणाचल प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘दुलारी कन्या’ योजना के तहत 38 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 15,500 से ज्यादा लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता दी गई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए ‘गर्ल्स हेल्थ एंड हाइजीन’ (बालिका स्वास्थ्य और स्वच्छता) योजना के तहत 25,000 से अधिक लाभार्थियों की सहायता के लिए 3.3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि तस्करी और डिजिटल शोषण जैसे मुद्दे किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने नागरिक समाज, परिवारों, शिक्षण संस्थानों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों से मिलकर काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने सम्मेलन में हुई चर्चाओं को क्षेत्र के बच्चों के हित में ठोस परिणामों में बदलने की अपील की।
