केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मध्यप्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल किया। वहीं, उनकी उम्मीदवारी के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी कर रहे कांग्रेस के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुरी (74) मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ कड़ी सुरक्षा के बीच पूर्वाह्न 11 बजे के आसपास विधानसभा भवन पहुंचे।
नामांकन दाखिल करने से पहले केंद्रीय मंत्री ने एक गुरुद्वारे में मत्था टेका और संत सुदेश शांडिल्य महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए करुणा धाम आश्रम पहुंचे। प्रदेश की मंत्री कृष्णा गौर भी उनके नामांकन पत्र की प्रस्तावकों में शामिल थीं। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को पुरी को उम्मीदवार घोषित किया था।
यह सीट केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई है। मुरुगन का कार्यकाल अप्रैल 2030 में समाप्त होना था। मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीट में से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को अदालत के फैसले के बाद अयोग्य ठहराए जाने के कारण 12 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए सदन के मौजूदा सदस्यों की संख्या 229 रह गई है।
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीट हैं, जिनमें से सात पर भाजपा और तीन पर कांग्रेस का कब्जा है, जबकि एक सीट रिक्त है। पुरी की उम्मीदवारी के खिलाफ संभावित प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल पुलिस ने नामांकन दाखिल होने से पहले कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष अमित खत्री को ऐशबाग थाने ले जाया गया, जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार और जिला अध्यक्ष अंकित दुबे को हबीबगंज थाने में हिरासत में रखा गया।
इन नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रकोष्ठ के समन्वयक अभिनव बरोलिया ने कहा, भाजपा असहमति की आवाज दबा रही है। हम पुरी के खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे।
उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को भी भोपाल में केंद्रीय मंत्री के पुतले जलाए थे। कांग्रेस पुरी की उम्मीदवारी का विरोध अमेरिका के दोषी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम के संदर्भों को लेकर कर रही है। इस बीच, सबकी नजरें बीना से भाजपा विधायक निर्मला सप्रे पर भी हैं।
वह खुद को कांग्रेस के साथ बताती हैं, लेकिन उन्हें भाजपा के कार्यक्रमों में भी शामिल होते देखा गया है। उनके खिलाफ दलबदल का मामला लंबित होने के कारण उनके मतदान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों दलों की प्रभावी सदस्य संख्या का आकलन करना मुश्किल हो गया है।
पुरी के शुक्रवार शाम भोपाल पहुंचने से कुछ घंटे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें भाजपा का उम्मीदवार बनाए जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुरी को राज्यसभा भेजने के लिए एक दलित नेता (मुरुगन) से इस्तीफा दिलवाया गया। पटवारी ने दावा किया था कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच मुलाकातें हुईं तथा ईमेल का आदान-प्रदान हुआ।
उन्होंने इस संबंध में भाजपा और केंद्रीय मंत्री से जवाब देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था, कांग्रेस की लड़ाई पारदर्शिता, जवाबदेही और मध्यप्रदेश की राजनीतिक गरिमा के लिए है, न कि किसी व्यक्ति के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के लिए। पुरी विपक्षी दल की ओर से इस मामले में लगाए गए सभी आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं।
