प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग के मामले में लगभग 31.70 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है तथा 17 लोगों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दायर की है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि ईडी के रायपुर क्षेत्र कार्यालय ने 29 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) , 2002 के तहत अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया और 30 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत (पीएमएलए) में पूरक अभियोजन शिकायत दायर की।
बयान के अनुसार, इस शिकायत में सतपाल सिंह छाबड़ा, मंदीप चावला और 15 अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। यह कथित घोटाला राज्य में पिछली भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। एजेंसी ने बताया कि धन शोधन की जांच राज्य के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो/राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू), रायपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी।
इसके बाद, छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा कांकेर जिले में दर्ज प्राथमिकी और एसीबी/ईओडब्ल्यू की प्राथमिकी को भी इस जांच में शामिल कर लिया गया। ईडी की जांच से पता चला है कि खनन से प्रभावित क्षेत्रों और समुदायों के कल्याण और विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ फंड को कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और एजेंटों या बिचौलियों के एक संगठित सिंडिकेट ने हड़प लिया। एजेंसी का दावा है कि इस सिंडिकेट ने डीएफएफ फंड के आवंटन और इस्तेमाल में हेरफेर की।
उन्होंने ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी, जिनमें खरीद की लागत को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था और भारी मात्रा में अवैध कमीशन का भुगतान किया गया। ईडी के अनुसार, एजेंटों और बिचौलियों ने रेट कॉन्ट्रैक्ट रखने वाली कंपनियों को जारी किए गए खरीद ऑर्डरों की कुल कीमत का 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला। इसमें कहा गया है कि इन कमीशन का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को दिया गया, जिसके बदले में उन्हें डीएमएफ से होने वाले काम आवंटित किए गए, परचेज ऑर्डर जारी किए गए और भुगतान जारी किए गए।
एजेंसी ने बताया कि ये कमीशन नकद और बैंकिंग चैनलों, दोनों तरह से वसूले गए। इसके बाद, पैसे के स्रोत को छिपाने के लिए इसे अलग-अलग संस्थाओं और खातों के जरिए घुमाया गया। एजेंसी के अनुसार, जांच में यह भी पता चला कि एजेंटों ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के जरिए की गई खरीद के मामलों में भी इसी तरह कमीशन वसूला था।
इसमें डीएमएफ के अलावा अन्य फंडों का इस्तेमाल किया गया था। ईडी ने छाबड़ा की पहचान इस कथित सिंडिकेट के मुख्य संपर्क कर्ताओं और वित्तीय समन्वयकों में से एक के रूप में की है। आरोप है कि उसने चुनिंदा वेंडरों को सप्लाई से जुड़े काम दिलाने, परचेज ऑर्डर जारी करवाने, भुगतान रिलीज करवाने और अवैध कमीशन वसूलने व बांटने में मदद की।
एजेंसी ने उसे एक सितंबर, 2026 को गिरफ्तार किया। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में आरोपियों द्वारा अपराध से जुटाई गई रकम लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसके बदले में 31.70 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त (अटैच) की गई है। ईडी ने बताया कि इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस अधिकारी रानू साहू भी शामिल हैं।
साथ ही, लगभग 50 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। डीएमएफ एक ट्रस्ट है, जिसे माइनिंग लीज (खनन पट्टा) धारकों के योगदान से फंड मिलता है। इसे राज्य के विभिन्न जिलों में स्थापित किया गया है, ताकि खनन से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों में कल्याणकारी और विकास कार्य किए जा सकें।
