केंद्र में पिछले 12 वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार इन दिनों पुनः उस एकजुट विपक्ष के निशाने पर है, जिसे वह अबतक चुनावी सियासी पाट पर पछाड़ते आई है। लेकिन जिस तरह से बहुरूपिया विपक्ष कभी मुसलमानों के छद्म वेश में, कभी किसानों के रूप में और कभी छात्रों के छद्म वेश में जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने पर तुला हुआ है, उसके पीछे विदेशी हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी सरकार सबसे जूझ रही है!
हाल ही में छात्र आंदोलन की कथित सफलता से घबराई सरकार ने जिस तरह से अपने ओबीसी रणनीतिकार शिक्षा मंत्री की राजनीतिक बलि चढ़ाई है, और इससे उत्साहित कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जिस घमंड का प्रदर्शन किया, उससे विपक्ष उत्साहित है। यही वजह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लिया जाने लगा है।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का अतीत और खुद देश का भविष्य करार दिया है, उसके मुताल्लिक इतना ही इशारा करना काफी होगा कि भाजपा के चाणक्य अमित शाह ने देश का भविष्य तय कर दिया है और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आगे करके एक तीर से कई शिकार करने की योजना बनाई है, क्योंकि भाजपा की ओबीसी राजनीति में श्री चौधरी अपने नैसर्गिक सियासी गुणों के चलते फिट बैठते हैं। ये अभी अंदरखाने की बात है, लेकिन राहुल गांधी को आगाह करने के लिए मैंने इस सच्चाई को डिस्क्लोज कर दिया है, जो हिंदी पट्टी के मिजाज पर फिट बैठता है।
शायद यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व ने अपने सर्वाधिक संकटग्रस्त काल से गुजरते हुए अपने सांसदों और सहयोगी सांसदों को याद किया, जिसे राजनीतिक गलियारे में एनडीए सांसदों के “मंगल मिलन” की उपमा दी गई है। हालांकि यह अनौपचारिक बैठक, संवाद या सामूहिक कार्यक्रम संसद सत्र के दौरान हरेक मंगलवार को आहूत होती है। हालिया एनडीए संसदीय दल की “मंगल मिलन” बैठक गत 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) को, संसद के मानसून सत्र के दौरान हुई।
यह “मंगल मिलन” नाम से आयोजित होने वाली नियमित मंगलवार की संसदीय दल की बैठक थी। जो नई दिल्ली में संसद पुस्तकालय भवन (Parliament Library Building) के जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम (GMC Balayogi Auditorium) में संपन्न हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, संसदीय कार्य मंत्री तथा एनडीए के अनेक सांसद और वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
इसमें एनडीए के सभी प्रमुख घटक दलों के सांसद शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल (यूनाइटेड) [JD(U)], तेलगु देशम पार्टी (TDP),लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP(RV)], हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM), अपना दल (सोनेलाल) अन्य एनडीए सहयोगी दलों के सांसद शामिल हुए। खास बात यह कि पहली बार नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसद भी बैठक में शामिल हुए, क्योंकि पार्टी को हाल में एनडीए का सहयोगी बनाया गया है। इस बैठक की सबसे चर्चित बात NCPI सांसदों की पहली भागीदारी रही, जिसे एनडीए के विस्तार और संसद में संख्या एवं राजनीतिक समन्वय को मजबूत करने के संकेत के रूप में देखा गया।
इस मंगल मिलन के कई राजनीतिक और संगठनात्मक संकेत/मायने निकलकर सामने आते हैं:
पहला, संगठनात्मक एकजुटता का प्रदर्शन: यह विपक्ष और सहयोगी दलों को संदेश कि एनडीए के सभी घटक दल एकजुट हैं और सरकार के साथ मजबूती से खड़े हैं।
दूसरा, संसद सत्र की रणनीति: संसद में सरकार के विधेयकों, विपक्ष की रणनीति और विभिन्न मुद्दों पर साझा रुख तय करने का अवसर समझा जाता है।
तीसरा, आगामी चुनावों की तैयारी: देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों से पहले सांसदों को बूथ स्तर तक सक्रिय रहने और जनता से संवाद बढ़ाने का संदेश दिया गया।
चौथा, सरकार की उपलब्धियों का प्रचार: सांसदों को निर्देश दिया जा सकता है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुँचाएं।
पांचवां, सहयोगी दलों को महत्व: एनडीए में शामिल छोटे और क्षेत्रीय दलों को सम्मान और भागीदारी का संदेश देकर गठबंधन को मजबूत बनाए रखना है।
छठा, विपक्षी इंडिया गठबंधन को राजनीतिक संदेश: यह दिखाना कि एनडीए में नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं है और गठबंधन स्थिर है।
सातवां, 2029 की दीर्घकालिक रणनीति: केवल वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों पर नहीं, बल्कि अगले लोकसभा चुनाव तक संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करने की दिशा में तैयारी।
उल्लेखनीय है किभारतीय राजनीति में ऐसे कार्यक्रम अक्सर केवल सामाजिक मेल-मिलाप नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से राजनीतिक संदेश दिए जाते हैं, सांसदों का मनोबल बढ़ाया जाता है, संगठनात्मक अनुशासन मजबूत किया जाता है, और भविष्य की रणनीति पर अनौपचारिक चर्चा होती है। इसलिए “मंगल मिलन” को केवल सांस्कृतिक या सामाजिक आयोजन के बजाय राजनीतिक समन्वय, गठबंधन प्रबंधन और चुनावी तैयारी के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में भी देखा जा सकता है।
– कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक