भारत में कंसल्टिंग कारोबार के बढ़ते महत्व के बीच पीडब्ल्यूसी इंडिया ने अपने कारोबार को नए स्तर पर ले जाने की बड़ी योजना बनाई है। कंपनी पीडब्ल्यूसी अमेरिका के साथ मिलकर एक संयुक्त उपक्रम बनाने जा रही है। इस नई इकाई में भारत की कंसल्टिंग सेवाओं और अमेरिका की भारत स्थित गति केंद्रों को एक साथ लाया जाएगा। शुरुआत में इस इकाई में करीब 40,000 कर्मचारी होंगे।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के अध्यक्ष संजीव कृष्ण के अनुसार, प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम में पीडब्ल्यूसी अमेरिका की 50.1 प्रतिशत और पीडब्ल्यूसी इंडिया की 49.9 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। हालांकि, संचालन का नियंत्रण पीडब्ल्यूसी इंडिया के पास रहेगा। इसमें अमेरिका द्वारा संचालित भारत स्थित गति केंद्र भी शामिल होंगे। यह सौदा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग सहित जरूरी नियामकीय मंजूरियों के अधीन है।
नई इकाई में पीडब्ल्यूसी इंडिया का कंसल्टिंग कारोबार शामिल किया जाएगा। इसमें प्रबंधन परामर्श, प्रौद्योगिकी कंसल्टिंग और जोखिम कंसल्टिंग जैसी सेवाएं आएंगी। दूसरी ओर, कंपनी का लेखा परीक्षण, कर, सौदे और कुछ सरकारी सलाह से जुड़ा काम संयुक्त उपक्रम से बाहर रहेगा। संजीव कृष्ण ही प्रस्तावित नई इकाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी होंगे।
कृष्ण ने कहा कि यह कदम वैश्विक स्तर पर वृद्धि के लिए भारत की प्रतिभा और क्षमता में भरोसे को दिखाता है। उनका कहना है कि भारत में बड़ी और तेजी से विकसित हो रही कुशल प्रतिभा उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल अब वैश्विक ग्राहकों के लिए ज्यादा बड़े पैमाने पर किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि दुनिया की बड़ी पेशेवर सेवा कंपनियां भारत को केवल स्थानीय बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक कामकाज के महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर देख रही हैं। पीडब्ल्यूसी अमेरिका के वरिष्ठ भागीदार और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल ग्रिग्स ने कहा कि अलग-अलग बाजारों और काम करने की क्षमताओं को अलग रखने के बजाय उन्हें एक साथ लाने से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दी जा सकती हैं।
पीडब्ल्यूसी इंडिया में फिलहाल करीब 33,000 कर्मचारी हैं। गति केंद्रों के कर्मचारियों को जोड़ने के बाद नई व्यवस्था का आकार काफी बड़ा हो जाएगा। कंपनी का अनुमान है कि संयुक्त उपक्रम बनने के साथ उसका कारोबार लगभग 1.3 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 2 अरब डॉलर हो जाएगा। यह आंकड़ा भी नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम रूप लेगा।
संजीव कृष्ण के मुताबिक, इस संयुक्त उपक्रम के बाद कंपनी तीन साल में अपने कारोबार को पांच गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह लक्ष्य पीडब्ल्यूसी इंडिया की उस पिछली योजना से काफी अधिक है, जिसमें 2030 तक पांच साल में कारोबार तीन गुना करने की बात कही गई थी।
इस सौदे का सबसे बड़ा असर वैश्विक क्षमता केंद्रों के क्षेत्र में दिखाई दे सकता है। भारत में ऐसी इकाइयां तेजी से बढ़ रही हैं, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने वैश्विक कामकाज के लिए तकनीकी और प्रबंधन संबंधी सेवाएं संचालित करती हैं। पीडब्ल्यूसी को उम्मीद है कि नई संयुक्त व्यवस्था से भारत में मौजूद विशेषज्ञों और अमेरिका तथा यूरोप के भागीदारों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
बता दें कि भारत में चार बड़ी पेशेवर सेवा कंपनियों की कुल आय का आधे से ज्यादा हिस्सा अब तकनीक और प्रबंधन कंसल्टिंगसे आता है। इन कंपनियों के भारत स्थित वैश्विक सेवा केंद्रों में ढाई लाख से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रतिभा, लागत और वैश्विक ग्राहकों की बढ़ती मांग के कारण भारत इस क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
पीडब्ल्यूसी के लिए यह बदलाव केवल कर्मचारियों और कारोबार का विस्तार नहीं है। कंपनी भारत को अपने वैश्विक कंसल्टिंग कारोबार की वृद्धि के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहती है। पॉल ग्रिग्स के मुताबिक इसका उद्देश्य सिर्फ यह तय करना नहीं है कि काम कहां किया जाए, बल्कि अलग-अलग क्षमताओं को जोड़कर ग्राहकों के लिए बेहतर समाधान तैयार करना है। नई व्यवस्था भारत की भूमिका को वैश्विक कंसल्टिंग कारोबार में और मजबूत करने वाली पहल हैं।
