देहरादून, सात अगस्त उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा फैसला लेते हुए अमानकीकृत डेरी उत्पादों एवं गैर-दुग्ध उत्पादों यानी शुद्ध दूध के बजाय वनस्पति तेलों, स्टार्च और रसायनों से बनाए जाने वाले पनीर, घी और मक्खन जैसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त विनय शंकर पांडेय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह प्रतिबंध पूरे उत्तराखंड में तत्काल प्रभाव से लागू होगा। यह प्रतिबंध उन उत्पादों पर लागू होगा जो पनीर, घी, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पादों के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि जनस्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने तथा प्रदेशवासियों को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के मुख्यमंत्री के निर्देशों पर यह कार्रवाई की गयी है। उन्होंने बताया कि प्रतिबंध के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाएगा जिसके तहत डेरी इकाइयों, गोदामों, थोक एवं खुदरा बाजारों, होटलों, रेस्तरां और मिठाई की दुकानों की जांच की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध उत्पादों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने, उत्पाद जब्त करने और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
