अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख से घरेलू मुद्रा को मिले समर्थन के बीच रुपया शुक्रवार को तीन पैसे मजबूत होकर 95.42 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव कायम है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.39 प्रति डॉलर पर खुला।
कारोबार के दौरान यह 95.38 से 95.44 प्रति डॉलर के सीमित दायरे में रहा। अंत में 95.42 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की बढ़त दर्शाता है। रुपया बृहस्पतिवार को 12 पैसे टूटकर 95.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
एलकेपी सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि रुपये में इस सप्ताह कमजोरी का रुख रहा लेकिन कुल मिलाकर इसमें सीमित दायरे में ही कारोबार हुआ। त्रिवेदी ने कहा, ‘‘जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की तेजी आई थी और यह अब भी ऊंचे स्तर पर है। इससे रुपये पर आयात लागत का दबाव बना हुआ है।
वहीं, डॉलर सूचकांक 100 के स्तर से नीचे करीब 99.50 पर रहा, जिससे रुपये की गिरावट सीमित रही। निकट अवधि में रुपये के 95.10 से 95.80 के दायरे में रहने का अनुमान है। कच्चे तेल और डॉलर की दिशा रुपये के लिए प्रमुख कारक रहेगी।’’
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.78 पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 70.71 अंक टूटकर 78,009.25 अंक पर और निफ्टी 29.25 अंक की गिरावट के साथ 24,366 पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का वायदा भाव 0.99 प्रतिशत चढ़कर 87.93 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बृहस्पतिवार को शुद्ध आधार पर 510.69 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
