वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान अमेरिका के साथ टैरिफ से जुड़ी बाधाओं के बावजूद, भारत का अमेरिका को होने वाला माल निर्यात 11.1 प्रतिशत बढ़कर 50.81 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि अमेरिका से होने वाला आयात 26 प्रतिशत बढ़ गया। पिछले साल की इसी अवधि में अमेरिका को निर्यात 45.73 अरब अमेरिकी डॉलर था, जबकि आयात 25.66 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 32.33 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि टैरिफ को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार का विस्तार जारी रहा, हालांकि अमेरिका के साथ भारत का माल व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) एक साल पहले के 20.07 अरब अमेरिकी डॉलर से घटकर 18.48 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया।
इसे भी पढ़ें: Balochistan में नहीं थम रहीं Enforced Disappearances, 4 और लोग लापता हुए
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के दौरान, अमेरिका भारत के लिए वस्तुओं के निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा। इस बीच, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, और दोनों देश जल्द से जल्द इस समझौते को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अग्रवाल ने कहा बातचीत सही दिशा में चल रही है। हम काफी अच्छी स्थिति में हैं। हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द इस समझौते को अंतिम रूप देकर इस पर हस्ताक्षर कर लिए जाएंगे।” उन्होंने बताया कि यह समझौता अमेरिका में व्यापक टैरिफ ढांचे को अंतिम रूप दिए जाने पर निर्भर करेगा, जहां ‘सेक्शन 301’ के तहत एक समानांतर प्रक्रिया चल रही है।
इसे भी पढ़ें: Series बराबर करने के इरादे से South Africa का मास्टरस्ट्रोक, Team Squad में बड़ा बदलाव
उन्होंने कहा इस समझौते पर तब हस्ताक्षर किए जाएंगे जब समग्र टैरिफ ढांचे को औपचारिक रूप दिया जा रहा होगा। अमेरिका में भी ‘सेक्शन 301’ के कुछ नतीजों के आधार पर टैरिफ ढांचे को फिर से तैयार करने का काम समानांतर रूप से चल रहा है।” अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अमेरिकी बाजार में ‘प्राथमिक पहुंच’ (preferential access) चाहता है, ताकि उसके निर्यातक अन्य देशों के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकें। उन्होंने कहा, “जब आप कोई व्यापार समझौता करते हैं, तो यह आपको न केवल एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच देता है, बल्कि किसी विशेष बाजार में ‘प्राथमिक पहुंच’ भी प्रदान करता है।” उन्होंने आगे कहा कि अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारत को मिलने वाली यह ‘प्राथमिक पहुंच’, नए टैरिफ ढांचे का हिस्सा होगी। चल रही यह बातचीत काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देश अपने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं और साथ ही बाजार तक पहुंच को प्रभावित करने वाली टैरिफ संबंधी चुनौतियों का समाधान भी करना चाहते हैं।
