(छठे पैरा में नाम ठीक करते हुए)
ठाणे, 10 अक्टूबर महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक सरकारी आश्रम स्कूल के 11 वर्षीय आदिवासी छात्र की कथित तौर पर चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई मौत के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य और दो अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि छात्र विवेक सुभाष भोये भिवंडी तालुका के पिसे स्थित सरकारी आश्रम स्कूल में पांचवीं कक्षा में पढ़ता था।
उसे चार दिन से कथित तौर पर तेज बुखार था। इसके बाद स्कूल प्रशासन ने शुक्रवार को छात्र की मां को उसकी तबीयत खराब होने की सूचना दी। पुलिस के अनुसार, छात्र की मां ने अपनी शिकायत में बताया कि शुक्रवार सुबह छात्रावास के वार्डन राहुल जांजल ने उन्हें फोन कर विवेक की तबीयत खराब होने और उसे शाहपुर के सरकारी अस्पताल ले जाने की जानकारी दी।
एक अधिकारी ने बताया कि इसके बाद मां स्कूल पहुंचीं, जहां उन्होंने देखा कि विवेक को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। जब उन्होंने स्कूल के प्रधानाचार्य जयवंत सपले, वार्डन जांजल और कक्षा शिक्षक अशोक साल्वे से समय पर सूचना नहीं देने तथा उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराने के बारे में सवाल किया, तो उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। अधिकारी के मुताबिक, स्कूल के कर्मचारी और छात्र की मां उसे शाहपुर के सरकारी अस्पताल ले गए।
चिकित्सकों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन स्कूल के कर्मचारियों ने कथित तौर पर परिवार के सदस्यों को बाहर इंतजार करने के लिए कहा। करीब आधे घंटे के बाद छात्र ने दम तोड़ दिया जिसके बाद कर्मचारी अस्पताल परिसर से कथित तौर पर भाग गए। जनजातीय विकास विभाग की परियोजना अधिकारी तेजस्विनी गलांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि घटना की तत्काल जांच के बाद लापरवाही के आरोप में स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षक और छात्रावास के वार्डन को निलंबित कर दिया गया।
छात्र की मां की शिकायत के आधार पर शाहपुर पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 और किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों ने शाहपुर स्थित जनजातीय विकास विभाग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और छात्र का शव लेने से इनकार कर दिया।
आरोपियों को निलंबित किए जाने और उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद मामला शांत हुआ।
