पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने शनिवार को कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की उस टिप्पणी पर बात की जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी को किसी समझौता करने वाले (compromised) नेता की ज़रूरत नहीं है। वडिंग ने सवाल उठाया कि उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उस बयान में उनका नाम तक नहीं लिया गया था। साथ ही, उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच कोई भी मतभेद थोड़े समय के लिए ही होगा।
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यह सब पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक फेरबदल के बाद चल रही अंदरूनी कलह की अटकलों के बीच हो रहा है, जिसमें वडिंग राज्य पार्टी प्रमुख के पद पर बने रहे। राज्य पार्टी प्रमुख ने सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ अपने रिश्तों को भी दोहराया और कहा कि यह समस्या बस कुछ ही दिनों की है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अगर उन्होंने मेरा नाम तक नहीं लिया है, तो ‘समझौता करने वाले’ (compromised) नेता के बारे में उनके बयान को लेकर मुझ पर उंगली क्यों उठाई जा रही है? मैं सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ साढ़े चार से पांच साल तक रहा। अगर हममें से कोई भी समझौता करने वाला होता, तो हम इतने लंबे समय तक साथ नहीं रहते। पार्टी में कोई भी समझौता करने वाला नेता नहीं होना चाहिए। हमारे बीच की समस्या बस कुछ ही दिनों की बात है।
वारिंग की यह टिप्पणी रंधावा के उन बयानों के जवाब में आई है, जो आज चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत के घर पर पंजाब के लिए AICC प्रभारी भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद दिए गए थे। रंधावा ने कहा था कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो बेबाकी और मज़बूती से अपनी बात रख सकें; उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को ऐसे नेताओं की ज़रूरत नहीं है जो समझौते करने वाले हों।
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उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हमारी बातचीत सार्थक रही और हमने माना कि कभी-कभी पार्टी को कुछ फ़ैसले बदलने पड़ते हैं। नेतृत्व के लिए उनका संदेश साफ़ था कि आज मौजूद नेतृत्व के सामने हमारी मांग स्पष्ट है। हम पंजाब में कांग्रेस की सरकार चाहते हैं और हम कानून-व्यवस्था व भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को हल करना चाहते हैं। इसके लिए पार्टी में एकता ज़रूरी है, लेकिन हमें ऐसे नेताओं की भी ज़रूरत है जो बेबाकी और मज़बूती से अपनी बात रख सकें। हमें समझौते करने वाले नेताओं की ज़रूरत नहीं है।
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