पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए होने वाला उपचुनाव तेज़ी से बिहार में सबसे ज़्यादा चर्चा का विषय बनता जा रहा है। ‘जन सुराज’ के सूत्रों के अनुसार, पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। 4 जुलाई को ‘जन सुराज’ की एक अहम बैठक होगी, जिसमें उनकी उम्मीदवारी को लेकर अंतिम फ़ैसला होने की उम्मीद है। अगले दिन इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
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पिछले साल, प्रशांत किशोर ने राज्य में विधानसभा चुनाव न लड़ने का फ़ैसला किया था और इसके बजाय अपनी पार्टी का आधार मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का विकल्प चुना था। बाद में उन्होंने कहा कि यह एक ग़लती हो सकती थी। न केवल उनकी पार्टी राज्य में अपना खाता खोलने में नाकाम रही, बल्कि उसे उम्मीद के मुताबिक़ 12 से 15 प्रतिशत के बजाय केवल 4 प्रतिशत के आसपास वोट मिले। बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है। बीजेपी नेता नितिन नवीन इस सीट से विधायक रह चुके हैं। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हो गई, जिससे उपचुनाव ज़रूरी हो गया। अगर प्रशांत किशोर यहाँ से चुनाव लड़ते हैं, तो इस मुक़ाबले को बीजेपी और जन सुराज के बीच सीधी टक्कर के तौर पर देखा जाएगा।
यह चुनाव दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है। बीजेपी के लिए दांव पर बहुत कुछ लगा है क्योंकि यह सीट पार्टी के एक प्रमुख नेता के पास थी। अगर हार होती है, तो विपक्ष इसे एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर पेश करेगा; वहीं जीत मिलने पर बीजेपी इसे जनता के भरोसे और इलाके पर अपनी मज़बूत पकड़ के सबूत के तौर पर दिखा सकेगी।
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यह चुनाव प्रशांत किशोर के लिए भी उतना ही अहम है। पिछले कुछ सालों से वे बिहार की राजनीति में बदलाव की वकालत कर रहे हैं। उन्होंने पूरे राज्य में पदयात्रा की, ‘जन सुराज’ अभियान शुरू किया और आखिरकार अपनी पार्टी बनाई। अब उन्हें सीधे चुनाव लड़कर और जनता का सामना करके अपनी राजनीतिक काबिलियत साबित करनी होगी। जन सुराज का कहना है कि बांकीपुर के लोग बदलाव चाहते हैं। पार्टी का दावा है कि भले ही इस इलाके में करीब 40 साल से बीजेपी का दबदबा रहा है, लेकिन अब जनता एक नई तरह की राजनीति और नई लीडरशिप चाहती है। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी पर स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से सलाह-मशविरे के बाद ही विचार किया जा रहा है। अगर प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो यह चुनाव सिर्फ़ एक सीट की लड़ाई नहीं रह जाएगा।
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