इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईआईटीएम), जनकपुरी द्वारा 21 से 23 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय एआईसीटीई अनुमोदित यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू (UHV-I) फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थान ने मूल्य-आधारित शिक्षा, नैतिक नेतृत्व तथा शिक्षकों के समग्र मानवीय विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू (UHV) के सिद्धांतों के प्रति संवेदनशील बनाना था, ताकि वे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नैतिक, मानवीय एवं जीवन-मूल्य आधारित दृष्टिकोण को प्रभावी रूप से समाहित कर एक संवेदनशील, उत्तरदायी एवं मूल्यनिष्ठ शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में योगदान दे सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान की निदेशक एवं कार्यक्रम की संयोजक प्रो. (डॉ.) रचिता राणा ने कहा कि यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि समतामूलक, संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान एवं तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में उत्तरदायित्व, नैतिक आचरण, सहानुभूति तथा मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रतिभागियों के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन को समृद्ध करेगा तथा मूल्य-आधारित शिक्षा की संस्कृति को और अधिक सशक्त बनाएगा।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए संस्थान के उपनिदेशक एवं कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. गणेश कुमार वाधवानी ने फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम की रूपरेखा, उद्देश्यों एवं तीन दिवसीय विस्तृत कार्ययोजना से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों को मूल्य-आधारित शिक्षा की व्यवहारिक समझ प्रदान करने तथा यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू को शिक्षण प्रक्रिया एवं संस्थागत गतिविधियों में प्रभावी रूप से समाहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एआईसीटीई के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. मुंसी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों का विकास एक सतत प्रक्रिया है, जो व्यक्ति, संस्था एवं समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है। उन्होंने प्रतिभागियों को यह भी अवगत कराया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) देशभर के तकनीकी एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इस अवसर पर एआईसीटीई के ऑब्जर्वर डॉ. विजय पाल सिंह ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की तकनीकी प्रक्रियाओं, उपस्थिति प्रणाली तथा एआईसीटीई के दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि उत्तरदायी, नैतिक एवं सामाजिक रूप से जागरूक नागरिकों का निर्माण करना है।
कार्यक्रम के सभी शैक्षणिक सत्रों का संचालन विषय विशेषज्ञ डॉ. बी.के. शर्मा ने किया। उन्होंने यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू की मूल अवधारणाओं को क्रमबद्ध एवं व्यावहारिक रूप से प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया। प्रथम दिवस के सत्रों में “समग्र विकास एवं शिक्षा की भूमिका” विषय पर व्यक्ति के बौद्धिक, भावनात्मक, नैतिक एवं सामाजिक विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके पश्चात “स्व-अन्वेषण, सुख एवं समृद्धि” विषय पर प्रतिभागियों को आत्मबोध, जीवन के वास्तविक उद्देश्य तथा संतुलित एवं संतोषपूर्ण जीवन की अवधारणा से परिचित कराया गया। “मानव में सामंजस्य” तथा “स्वयं के साथ सामंजस्य” विषयों पर आयोजित संवादात्मक सत्रों ने प्रतिभागियों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया तथा व्यक्तिगत एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति उनकी समझ को और अधिक सुदृढ़ किया। दिन का समापन समूह चर्चा एवं चिंतन सत्रों के साथ हुआ, जिससे प्रतिभागियों को विषय की गहन एवं व्यवहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दूसरे दिन का केंद्रबिंदु परिवार में विश्वास, सम्मान एवं सामंजस्य रहा। दिन की शुरुआत प्रतिभागियों के अनुभव-साझाकरण एवं प्रथम दिवस के पुनरावलोकन से हुई। इसके बाद “समृद्धि एवं स्वास्थ्य” विषय पर चर्चा करते हुए डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि वास्तविक समृद्धि केवल भौतिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलित जीवन, स्वस्थ संबंधों एवं मानसिक संतोष से प्राप्त होती है।
इसके उपरांत आयोजित “परिवार में सामंजस्य – विश्वास” तथा “परिवार में सामंजस्य – सम्मान” विषयक सत्रों में पारदर्शिता, पारस्परिक उत्तरदायित्व, सम्मान एवं प्रभावी संवाद की भूमिका पर विशेष बल दिया गया। “परिवार में अन्य भावनाएँ” विषय पर आयोजित सत्र में प्रेम, स्नेह, करुणा, कृतज्ञता एवं सहयोग जैसे मानवीय मूल्यों को व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। पूरे दिन प्रतिभागियों ने समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर, विचार-विमर्श एवं अनुभव-साझाकरण में उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में मानवीय मूल्यों के व्यावहारिक अनुप्रयोग को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के अंतिम दिन चर्चा का दायरा व्यक्ति एवं परिवार से आगे बढ़कर समाज, प्रकृति एवं समग्र अस्तित्व तक विस्तारित किया गया। पूर्व दिवस की समीक्षा के पश्चात डॉ. बी.के. शर्मा ने “समाज में सामंजस्य” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि एक संवेदनशील, उत्तरदायी एवं मूल्यनिष्ठ नागरिक ही शांतिपूर्ण एवं प्रगतिशील समाज की नींव रख सकता है।
इसके पश्चात “प्रकृति के साथ सामंजस्य” विषय पर पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित एवं जिम्मेदार उपयोग तथा सतत विकास की अवधारणा पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों को यह संदेश दिया गया कि प्रकृति के साथ संतुलित संबंध ही मानव जीवन की स्थिरता एवं समृद्धि का आधार है।
समापन शैक्षणिक सत्र “अस्तित्व में सामंजस्य” पर केंद्रित रहा, जिसमें जीवन, प्रकृति एवं समग्र अस्तित्व की परस्पर संबद्धता को समझाते हुए सह-अस्तित्व एवं पारस्परिक समृद्धि पर आधारित समग्र दृष्टिकोण विकसित करने पर बल दिया गया। इसके पश्चात प्रतिभागियों का आत्म-मूल्यांकन कराया गया, जिसमें उन्होंने तीन दिनों की सीख पर चिंतन करते हुए मूल्य-आधारित शिक्षण को अपने व्यावसायिक जीवन में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
समापन समारोह में लोकल प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. गोपाल सिंह लटवाल एवं लोकल प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर डॉ. गजेंद्र कुमार सारस्वत ने सभी प्रतिभागियों, संसाधन व्यक्तियों तथा आयोजन समिति के सदस्यों को कार्यक्रम की सफल पूर्णता पर बधाई देते हुए कहा कि यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू का वास्तविक उद्देश्य केवल इन सिद्धांतों को समझना नहीं, बल्कि उन्हें अपने दैनिक व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में आत्मसात करना है।
इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ डॉ. बी.के. शर्मा, एआईसीटीई ऑब्जर्वर डॉ. विजय पाल सिंह तथा एआईसीटीई क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. मुंसी यादव को कार्यक्रम में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। समापन समारोह का प्रभावी मंच संचालन डॉ. लतिका मल्होत्रा ने किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, संसाधन व्यक्तियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस तीन दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम से प्राप्त ज्ञान, अनुभव एवं आत्मचिंतन शिक्षकों में मूल्य-आधारित शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा उन्हें नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं समग्र मानवीय विकास के प्रति प्रेरित करेगा। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि आईआईटीएम शिक्षा में उत्कृष्टता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता एवं उत्तरदायी नागरिकता के विकास के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है।
आईआईटीएम में तीन दिवसीय एआईसीटीई अनुमोदित यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यू (UHV-I) फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजन
सिद्धभूमि के लेखक एक प्रमुख समाचार लेखक हैं, जिन्होंने समाज और राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहरी जानकारी और विश्लेषण प्रदान किया है। उनकी लेखनी न केवल तथ्यात्मक होती है, बल्कि समाज की जटिलताओं को समझने और उजागर करने की क्षमता रखती है। उनके लेखों में तात्कालिक घटनाओं के विस्तृत विश्लेषण और विचारशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को समाज के विभिन्न पहलुओं पर सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
Related Posts
सिद्धभूमि -
एक ऐसे समय में जब प्रिंट एवं मुद्रण अपनी प्रारंभिक अवस्था में था ,समाचार पत्र अपने संसाधनो के बूते निकाल पाना बेहद दुष्कर कार्य था ,लेकिन इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” ने 12 मार्च 1978 को पडरौना (कुशीनगर ) उत्तर प्रदेश से सिद्ध भूमि हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन आरम्भ किया | स्वर्गीय श्री शयाम सुन्दर मिश्र “प्रान ” सीमित साधनों व अभावों के बीच पत्रकारिता को मिशन के रूप में लेकर चलने वाले पत्रकार थे । उनका मानना था कि पत्रकारिता राष्ट्रीय लोक चेतना को उद्वीप्त करने का सबसे सशक्त माध्यम है । इसके द्वारा ही जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखा जा सकता है । किसी भी संस्था के लिए चार दशक से अधिक का सफ़र कम नही है ,सिद्ध भूमि ने इस लम्बी यात्रा में जनपक्षीय सरोकारो को जिन्दा रखते हुए कर्मपथ पर अपने कदम बढ़ाएं हैं और भविष्य के लिए भी नयी आशाएं और उम्मीदें जगाई हैं । ऑनलाइन माध्यम की उपयोगिता को समझते हुए सिद्ध भूमि न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात जुलाई 2013 में किया गया |
हमसे संपर्क करने और जुड़ने के लिए मेल करें -
siddhbhoomi@gmail.com Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2025 Siddhbhoomi.com. Designed with ❤️ by Abiral Pandey.
