वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि वह दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए 24 अगस्त से चार दिन की जापान यात्रा पर जाएंगे। जापान ने एक दशक में भारत में 10 अरब येन (करीब 60,000 करोड़ रुपये) के निवेश का लक्ष्य रखा है। मंत्री ने यहां एक जापानी प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह निवेश जमीन पर पहले से दिखाई दे रहा है।
इसमें मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना, दिल्ली, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में जापान की मदद से विकसित मेट्रो प्रणालियां तथा आठ राज्यों में स्थापित 11 जापानी औद्योगिक नगर शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य और इसके लिए सात धाराओं या ‘सप्त धारा’-विनिर्माण, कृषि, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा एवं रक्षा, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था तथा ‘सॉफ्ट पावर’…का जिक्र करते हुए गोयल ने कहा कि बदलाव के ये सभी आधार ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत और जापान की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। गोयल ने कहा, ‘‘यह केवल वृद्धि गाथा नहीं है, बल्कि वैश्विक प्रगति में भरोसेमंद साझेदार बनने की हमारी प्रतिबद्धता है।’’
उन्होंने कहा कि 2025-26 में भारत-जापान के बीच 27.5 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार दोनों देशों की वास्तविक क्षमता का अभी एक छोटा हिस्सा है।
जापान आज भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है। भारत में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें वाहन क्षेत्र में सुजुकी, टोयोटा और होंडा, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सोनी तथा इंजीनियरिंग क्षेत्र में हिताची और मित्सुबिशी जैसी कंपनियां शामिल हैं।
गोयल ने कहा, ‘‘अगले सप्ताह, 24 से 27 अगस्त तक, मुझे एक बार फिर जापान जाने और सरकार तथा उद्योग जगत के शीर्ष स्तर पर इन बातचीत को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस दौरान पुराने मित्रों से मुलाकात, नए साझेदारों के साथ संवाद और दोनों देशों की विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर होगा।
