शिरीष बी प्रधान
काठमांडू, 29 अगस्त नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जारी तलाश एवं राहत अभियानों के तहत बचाव टीम ने फंसे 163 विदेशियों सहित लगभग 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है। इस आपदा में 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण जनहानि के साथ-साथ मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान हुआ है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं।
खोज एवं बचाव अभियानों के लिए नेपाल सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। नेपाल सेना के जनसंपर्क निदेशालय के अनुसार, अब तक 163 विदेशी नागरिक समेत 2,465 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इन विदेशियों में 113 भारतीय, 26 चीनी, 15 दक्षिण कोरियाई, चार जर्मन, इटली और अमेरिका के दो-दो तथा ओमान का एक नागरिक शामिल हैं।
निदेशालय ने बताया कि त्रिशूली और रसुवा की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को निकाला गया। सुरक्षित निकाले गए लोगों में से 2,265 को हेलीकॉप्टर के माध्यम से, जबकि 200 लोगों को जमीनी रास्तों से बाहर लाया गया। धुंचे और त्रिशूली में स्थापित आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ प्रभावित विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए 1,706 लोगों को अब तक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है।
इस बीच, नेपाल पुलिस ने एक सूचना में बताया कि राजधानी को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी मार्ग, मुगलिंग-काठमांडू राजमार्ग शनिवार को फिर से चालू हो गया। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण यह रास्ता बुधवार से बंद था। नेपाल पुलिस ने कहा कि स्थिति का आकलन करने के बाद राजमार्ग पर आवागमन फिर से शुरू कर दिया गया है और वाहनों को धीरे-धीरे उनके गंतव्य की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है।
इससे कई दिनों से राजमार्ग पर फंसे यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण पिछले चार दिन से मध्य नेपाल में राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य प्रमुख सड़क के कुछ हिस्से अवरूद्ध थे। इस बीच, शुक्रवार रात तक प्रधानमंत्री आपददा राहत कोष में 2.295 अरब रुपये से अधिक की राशि एकत्र हो चुकी है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, कोष को बुधवार दोपहर से बृहस्पतिवार मध्यरात्रि तक 36 घंटे के भीतर 1.91 अरब रुपये मिले, जबकि अकेले शुक्रवार को 38.55 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दान की गई। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह राशि 10 विभिन्न वाणिज्यिक बैंक के खातों में जमा की गई है। नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आने के बाद सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों को आपदा क्षेत्र घोषित कर दिया था।
इस फैसले के बाद विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों ने कोष में दान दिया। हालिया योगदान के बाद, कोष में राशि बढ़कर 4.09 अरब रुपये हो गया है जो पहले 2.17 अरब रुपये थी। सरकार ने वित्त मंत्रालय को राहत कोष में अंशदान एकत्र करने और सहायता समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय नामित किया है।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले के सचिवालय के अनुसार, वे संस्थागत दाताओं से एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के योगदान को व्यक्तिगत रूप से स्वीकार कर रहे हैं। सचिवालय ने कहा कि व्यक्तिगत दानदाता स्वयं मंत्रालय जाकर नकद योगदान दे सकते हैं।
