तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों के समूह के लिए कैलाश यात्रा धार्मिक आस्था और विश्वास के साथ शुरू हुई थी लेकिन नेपाल के तिमुरे इलाके में अचानक आई बाढ़ के बाद तबाह और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के एक डरावने अनुभव में बदल गयी। शिवरंजनी और उनके साथी यात्रियों के लिए, अचानक आई बाढ़ ने सयाब्रु बेस और केरुंग (जो नेपाल और तिब्बत के बीच ज़मीनी रास्ता और ऊंचाई पर स्थित पड़ाव हैं) के बीच के पहाड़ी दर्रे को मौत के एक भयावह चक्रव्यूह में बदल दिया। फिर भी, चारों तरफ फैले बाढ़ के पानी, भूस्खलन की घटनाओं और भारी दहशत के बीच, कुछ चमत्कारिक संयोगों और निस्वार्थ बहादुरी की वजह से हर कोई सुरक्षित घर पहुंच पाया।
शिवरंजनी ने शनिवार को उन पलों को याद करते हुए कहा, ‘‘अगर हमारी गाड़ी इस तरफ या उस तरफ पांच फुट भी आगे-पीछे हो जाती, तो हम निश्चित रूप से बह गए होते। मुझे कहना होगा कि भगवान ने हमें पांच फुट के फासले से बचा लिया।’’
उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई थी जब उनकी गाड़ी भारतीय दूतावास की जांच चौकी के पास तीन तरफ से घिर गई थी। शिवरंजनी ने कहा, ‘‘अच्छी बात यह रही कि भगवान शिव की कृपा से, हम दाईं ओर एक मोड़ की तरफ बढ़ पाए।
आपने वहां पानी को स्पष्ट रूप से देखा होगा। दूतावास के आस-पास का पूरा इलाका पानी में डूबा हुआ था और हर चीज पानी के नीचे थी। पानी एक ही दिशा में बह रहा था।
चूंकि हमारी गाड़ी उस कोने पर थी, इसलिए वह दूसरी तरफ चली गई और हम उस खाली जगह से निकल पाए।’’
शिवरंजनी उन 21 तीर्थयात्रियों में शामिल थीं जो शुक्रवार देर रात हवाई अड्डे पहुंचे। राज्य के ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद और मानव संसाधन और प्रबंधन डी. सरथकुमार ने उनका स्वागत किया और उनकी तत्काल देखभाल व घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि जब पहाड़ पर जोरदार बारिश हो रही थी, तो पानी की एक तेज धार उनकी गाड़ी के पास से गुज़री, बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता दाईं ओर चालक की ओर वाला दरवाजा था।
कीचड़ में फिसलते-लुढ़कते हुए, तीर्थयात्री तेज़ी से बढ़ते पानी के बहाव के ऊपर बनी खड़ी ढलान पर चढ़ गए। उन्होंने कहा, ‘‘मायावरम के रहने वाले रत्नाकुमार और उनकी पत्नी पूंगुझली पहले ही ऊंची जगह पर सुरक्षित पहुंच चुके थे। लेकिन जब उन्होंने देखा कि चार-पांच महिलाएं कीचड़ वाली ढलान पर नहीं चढ़ पा रही हैं, तो रत्नाकुमार ने कुछ ऐसा किया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, वह खतरे वाली जगह पर नीचे उतर गए।’’
शिवरंजनी ने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, ‘‘साड़ी को मजबूती से बांधकर एक कामचलाऊ रस्सी बनाई गई, जिसकी मदद से रत्नाकुमार ने फंसी हुई महिलाओं को एक-एक करके फिसलन भरे किनारे से ऊपर खींचा, जबकि पूंगुझली ऊपर से उनकी मदद कर रही थीं।’’
उन्होंने भावुक आवाज में कहा, ‘‘अपनी जान बचाने के लिए जो कोई भी ऊपर चढ़ा था, वह दोबारा नीचे आने में हिचकिचाता, लेकिन वह वापस नीचे उतर गए।’’
शिवरंजनी ने कहा, ‘‘उस पल वे हमें पार्वती और परमेश्वर (भगवान शिव का एक नाम)जैसे लगे।
हमने कृतज्ञता के साथ उनके सामने सिर झुकाया।’’
दो दिनों तक, यह समूह पहाड़ों के मुश्किल हालात में सीमित खाने-पीने के सामान के सहारे और उम्मीद के बल पर जीवित रहा। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने लगातार फोन पर संपर्क बनाए रखा और कई एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान का समन्वय किया, जिससे तेजी से मदद मिल सकी। स्वदेश लौटने पर श्रद्धालुओं ने अधिकारियों, बचाव दलों और उन हजारों शुभचिंतक नागरिकों का दिल से आभार व्यक्त किया, जिनकी दुआओं ने उन्हें इस मुश्किल समय से उबारा।
हालांकि अफरा-तफरी में उनके मूल दस्तावेज खो गए थे, लेकिन उन्हें भरोसा दिलाया गया कि नए पासपोर्ट सीधे उनके घर पहुंचा दिए जाएंगे। बाल-बाल बची शिवरंजनी ने कहा, ‘‘भगवान शिव की कृपा से, हमारी गाड़ी एक छोटी सी जगह में मुड़ गई और हम बच गए। भगवान ने हमें पांच फुट के फासले से बचा लिया।
