नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) अपने जन्म और मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल बना रही है, हालांकि करीब एक सदी पुराने कुछ रजिस्टरों के पीले पड़ चुके पन्ने और धुंधली होती स्याही आज भी शहर के इतिहास से जुड़ी कड़ी बने हुए हैं। इन पुराने रजिस्टरों में पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी, कांग्रेस नेता संजय गांधी और यहां तक कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से जुड़ी प्रविष्टियां भी दर्ज हैं। इन भारी-भरकम रजिस्टरों में कई रिकॉर्ड हाथ से लिखे गए हैं।
एनडीएमसी ने बुधवार को रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया के लिए पूरी तरह ऑनलाइन और कागज रहित व्यवस्था शुरू की। कुछ रजिस्टर 1931 के हैं। इनमें शहर के अतीत की झलक मिलती है।
इन रजिस्टरों में आम निवासियों के साथ-साथ प्रमुख हस्तियों के जन्म और मृत्यु का विवरण दर्ज है। इनके पन्नों पर नयी दिल्ली क्षेत्र में जन्म लेने और अंतिम सांस लेने वाले लोगों का विवरण हाथ से लिखा गया है। नागरिक निकाय के अभिलेखागार में इन रिकॉर्ड को दशकों से सुरक्षित रखा गया है।
इन रिकॉर्ड में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और संजय गांधी से संबंधित प्रविष्टियां हैं। हस्तलिखित रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड और आधिकारिक हस्ताक्षर वाले ये दस्तावेज उस दौर की झलक दिखाते हैं, जब पंजीकरण के लिए कागजी दस्तावेजों और हाथ से तैयार किए जाने वाले बहीखातों पर निर्भर रहना पड़ता था। अधिकारियों ने बताया कि इन अभिलेखों से पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के शुरुआती जीवन से जुड़ी जानकारी की पुष्टि करने में भी मदद मिली।
मुशर्रफ का जन्म 1943 में दिल्ली में हुआ था। वर्ष 2005 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में भारत यात्रा के दौरान एनडीएमसी ने उनका जन्म प्रमाणपत्र खोजकर उन्हें सौंपा था। उस समय मुशर्रफ वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आ चुके थे।
उनका और उनके भाई-बहनों का जन्म कमला मार्केट स्थित लाला गिरधारीलाल प्रसूति अस्पताल में हुआ था। दशकों तक ऐसे रिकॉर्ड खोजने या उनमें सुधार कराने के लिए लोगों को पुराने रजिस्टर खंगालने और नगरपालिका कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। एनडीएमसी के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने पिछले सप्ताह नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की।
इसका उद्देश्य लोगों के लिए इस प्रक्रिया को आसान बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि नए पोर्टल पर जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके साथ ही पालतू पशुओं के पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत अब अस्पताल जन्म और मृत्यु संबंधी जानकारी एनडीएमसी को सीधे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजेंगे। इससे भौतिक दस्तावेज जमा कराने की जरूरत समाप्त हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया, “नागरिक मौजूदा प्रमाणपत्रों में विवरण ठीक कराने, बच्चे का नाम जुड़वाने, घर पर हुए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण कराने तथा विलंब से पंजीकरण के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।”
इस व्यवस्था का उद्देश्य कागजी कार्रवाई, प्रतीक्षा अवधि और प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना तथा पंजीकरण सेवाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है।
एनडीएमसी डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे में उसके पुराने रजिस्टर और उनमें हाथ से लिखी गई प्रविष्टियां अब इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी।
