भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लाल सागर क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर भारत बेहद चिंतित है। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में नागरिकों और आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों की निंदा की। मक्का जैसे पवित्र शहर को निशाना बनाने की कोशिश पर भी भारत पहले ही कड़ा विरोध जता चुका है। जायसवाल ने कहा कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करते हैं तथा बाब अल-मंदब जलमार्ग से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए ऐसी स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है और वह क्षेत्र में जल्द शांति तथा स्थिरता की बहाली की उम्मीद करता है।
प्रेस ब्रीफिंग में भारत-पाकिस्तान के बीच समुद्री टकराव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से भारत के विरोध पर दिया गया जवाब वही पुराना टालमटोल वाला रवैया है। उन्होंने आरोपों और संकेतों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना का पोत कोलकाता पश्चिमी अरब सागर में नियमित तैनाती पर था, तभी पाकिस्तानी नौसेना के पोत हुनैन ने समुद्र में अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर व्यवहार किया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पोतों की टक्कर हुई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी पोत की खतरनाक ढंग से आगे निकलने की कोशिश ने अप्रैल 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के अनुच्छेद 10 का उल्लंघन किया, जिसमें समुद्र में दोनों देशों की नौसैनिक इकाइयों के बीच कम से कम तीन समुद्री मील की दूरी रखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री टक्कर रोकथाम नियमों का उल्लंघन किया गया। हालांकि भारतीय पोत को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह समुद्र में अपनी तैनाती पर बना हुआ है।
इसके अलावा, बांग्लादेश में पूर्ववर्ती अवामी लीग सरकार के दौरान भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा किए जाने की खबरों पर भारत ने कहा कि इस संबंध में उसे आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। गंगा जल बंटवारे सहित जल संबंधी मुद्दों पर जायसवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी तंत्र मौजूद है और तकनीकी स्तर पर जल संबंधी बैठकें लगातार हो रही हैं।
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साथ ही अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर भी भारत ने अपनी चिंताएं स्पष्ट कीं। रूस और ईरान पर प्रस्तावित अमेरिकी कानून के संभावित प्रभावों को लेकर भारत पहले ही अमेरिकी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख चुका है। भारत ने विशेष रूप से अपनी ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और दोनों देशों के समग्र संबंधों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का उल्लेख किया। व्यापार समझौते पर संभावित असर के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को प्रतिबद्ध है और इस संबंध में भारतीय व्यापार तथा उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगा।
भारत-अमेरिका के बीच मादक पदार्थों की अवैध तस्करी रोकने के लिए मजबूत सहयोग जारी रहने की भी जानकारी दी गई। भारत का कहना है कि यह समस्या दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करती है, इसलिए दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाते रहेंगे।
मालदीव के साथ आर्थिक सहयोग पर जायसवाल ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक द्वारा मालदीव सरकार के लिए रखे गए कुल 150 करोड़ डॉलर के राजकोषीय प्रतिभूति निवेश की अंतिम 50 करोड़ डॉलर की किस्त 17 सितंबर को सफलतापूर्वक निपटा दी गई। ये प्रतिभूतियां 2019 से छह बार एक-एक वर्ष के लिए बढ़ाई गई थीं। मूलधन का भुगतान मालदीव सरकार ने किया, जबकि पिछले पांच वर्षों में इन प्रतिभूतियों पर करीब 45 करोड़ डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने वहन किया।
वहीं भूटान के साथ संबंधों को लेकर जायसवाल ने विदेश मंत्री की 16 से 18 सितंबर तक हुई यात्रा को सफल बताया। यात्रा के दौरान भूटान के राजा और प्रधानमंत्री से मुलाकात के साथ विकास सहयोग, ऊर्जा, जनसंपर्क और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत ने भूटान के विकास लक्ष्यों के प्रति समर्थन दोहराया। दोनों देशों के बीच छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तार किया गया और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस संबंधी समझौते के भूटान द्वारा अनुमोदन का स्वागत किया गया।
साथ ही ओडिशा के पारादीप बंदरगाह के पास रूसी तेल टैंकर से जुड़े मामले में भारत ने कहा कि टैंकर को ओडिशा उच्च न्यायालय के आदेश के तहत रोका गया है। रूसी चालक दल की स्वदेश वापसी के लिए भारत सरकार आवश्यक कार्रवाई कर रही है और रूसी दूतावास के लगातार संपर्क में है।
वहीं, ब्रिक्स में आंकड़ों के आदान-प्रदान से जुड़े प्रावधानों पर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन में इस संबंध में कुछ समझ बनी है, लेकिन किसी विशेष देश के संदर्भ में स्थिति स्पष्ट करने के लिए वह और जानकारी जुटाकर बाद में जवाब देंगे। सऊदी अरब में एक भारतीय नागरिक को मिली जेल की सजा के मामले में उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास स्थानीय सरकार के लगातार संपर्क में है और नागरिकों की सुरक्षा, देखभाल तथा कल्याण भारत की स्थायी प्राथमिकता है। यमन में संघर्षरत क्षेत्र में भारतीयों के होने संबंधी प्रभासाक्षी के सवाल पर जायसवाल ने कहा कि अभी तक हमें इस प्रकार की कोई सूचना नहीं मिली है कि यमन के संघर्षरत क्षेत्र में कोई भारतीय फँसा हुआ है। बहरहाल, आइये देखते हैं विस्तृत प्रेस वार्ता में जायसवाल ने और क्या बातें कहीं।
