भारत ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित करने के पाकिस्तान सरकार के कदम को “चालबाजी” करार देते हुए इस्लामाबाद से आतंकवाद से निपटने के लिए “ठोस कदम” उठाने की मंगलवार को मांग की। अजहर पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) की सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों की रेड बुक सूची में शामिल है और देश ने उस पर इनाम बरकरार रखा है। अजहर भारत में कुछ बड़े आतंकवादी हमलों के सिलसिले में वांछित है, जिनमें 2001 में संसद भवन पर हुआ हमला, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले, 2016 का पठानकोट वायुसैनिक अड्डा हमला और 2019 का पुलवामा हमला शामिल है।
अजहर पर इनाम बरकरार रखने के पाकिस्तान सरकार के फैसले के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “पाकिस्तान की ऐसी चालें और धोखेबाजी कोई नयी बात नहीं है। हमने पहले भी ऐसी चालबाजी देखी है।”
उन्होंने कहा, “आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले किसी देश का ऐसी झूठी घोषणाएं करना-हम सभी जानते हैं कि ये बातें कितनी खोखली हैं। पाकिस्तान को ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि झूठे ऐलान करने चाहिए।
ऐसी घोषणाओं का कोई मतलब नहीं है।”
भारत ने पाकिस्तान पर अजहर को लगातार पनाह देने का आरोप लगाया है, जबकि इस्लामाबाद का कहना है कि जैश प्रमुख अफगानिस्तान भाग गया और पिछले कुछ वर्षों से वहीं से आतंकवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज किया है। अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अजहर अफगानिस्तान में नहीं है।
इस्लामाबाद ने अजहर के बारे में जानकारी देने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय में की है, जब उस पर आतंकवादी समूहों और उनके नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) का दबाव है। पेरिस स्थित वैश्विक निगरानी संस्था एफएटीएफ अपनी आगामी बैठक में पाकिस्तान के आतंकवाद-विरोधी प्रयासों की समीक्षा करने वाली है। पाकिस्तान को धनशोधन के खिलाफ कार्रवाई करने और आतंकवाद का वित्तपोषण रोकने में नाकाम रहने के कारण 2018 से 2022 के बीच एफएटीएफ की ‘ग्रे सूची’ में रखा गया था।
‘ग्रे सूची’ से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान को कई कदम उठाने पड़े, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सहित अन्य आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाना और इनके नेताओं को दोषी ठहराना शामिल था। 2021 में जिन लोगों को उनकी गैर-मौजूदगी में दोषी ठहराया गया था, उनमें अजहर भी शामिल था। मई 2019 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
