कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को ईंधन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी करने पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी पार्टी आम आदमी की कमाई को किश्तों में लूट रही है। कीमतों में हुई इस नवीनतम बढ़ोतरी पर प्रतिक्रिया देते हुए खर्गे ने कहा कि अतीत में जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें गिरीं, तो केंद्र सरकार ने नागरिकों को इसका पूरा लाभ नहीं दिया। उन्होंने कांग्रेस के इस आरोप को भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझौते के तहत काम कर रहे हैं।
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खरगे ने X पर एक पोस्ट में लिखा कि पेट्रोल की कीमत अब 100 रुपये के पार पहुंच गई है। इस बार तो जनता की कमाई को किश्तों में लूटा जा रहा है! पेट्रोल-डीजल पर प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये का केंद्रीय कर लगाने के बाद भी भाजपा की भूख शांत नहीं हुई है। जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम थीं, तो उन्होंने इसका लाभ जनता तक नहीं पहुंचाया – बल्कि उन्हें बेरहमी से लूटा। जब संकट आया, तो वे सीधे चुनाव में कूद पड़े, और चुनाव के बाद त्याग का उपदेश देने लगे।
प्रशासन के इस दावे का खंडन करते हुए कि भारत में ईंधन की कीमतें विदेशी देशों की तुलना में कम हैं, खरगे ने इस बात का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सरकारों ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के आर्थिक प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए कदम उठाए। उन्होंने लिखा कि जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा और प्रधानमंत्री मोदी हम भारतीयों को ‘सब ठीक है’ का दिलासा देने में व्यस्त थे, तब अन्य देश अपने नागरिकों को राहत दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि 1. इटली ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क कम किया, जिससे वहां के लोगों को कुछ राहत मिली। 2. ऑस्ट्रेलिया ने उत्पाद शुल्क कम किया, जिससे नागरिकों के लिए पेट्रोल की कीमतें लगभग 17 रुपये प्रति लीटर कम हो गईं। 3. जर्मनी ने तेल पर कर कम किया, जिससे ईंधन की कीमतें 17-19 रुपये प्रति लीटर कम हो गईं। 4. ब्रिटेन ने परिवारों को तेल सहायता के रूप में 100 पाउंड दिए और ईंधन और बिजली पर कर कम किए। 5. आयरलैंड के 250 मिलियन यूरो के राहत पैकेज से पेट्रोल की कीमतें लगभग 0.15 यूरो प्रति लीटर और डीजल की कीमतें 0.20 यूरो प्रति लीटर कम हो गईं।
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उन्होंने लिखा कि नरेंद्र मोदी जी, हमें बताइए– इस किश्त आधारित लूट में किस-किस का हिस्सा है? आप इतने समझौतावादी क्यों हैं? इस सरकार में असली संकट नेतृत्व का है– 140 करोड़ भारतीयों को अब यह बात समझ आ गई है। खरगे की ये टिप्पणियां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच आई हैं।
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