मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक बड़ा दावा किया है। इंदौर में शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली में छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन भाजपा अध्यक्ष से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष से साफ कहा था कि अगर उन्हें लगता है कि इस्तीफा जरूरी है, तो वे पद छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
विदेशी ताकतों की साजिश हुई नाकाम
विजयवर्गीय ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने उन विदेशी ताकतों के इरादों पर पानी फेर दिया जो भारत में हिंसा फैलाकर देश का माहौल खराब करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें भारत में बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात पैदा करना चाहती थीं, लेकिन प्रधान के इस कदम से वह साजिश नाकाम हो गई। इस फैसले के लिए विजयवर्गीय ने धर्मेंद्र प्रधान को बधाई दी।
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भाजपा अध्यक्ष ने दी थी सब्र रखने की सलाह
विजयवर्गीय के मुताबिक, जब आंदोलन के पहले दिन प्रधान ने पद छोड़ने की बात कही, तो भाजपा अध्यक्ष ने उनसे कहा कि अभी इस मुद्दे पर कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। इसलिए जब तक पार्टी कोई तय फैसला नहीं ले लेती, तब तक उन्हें न तो इस्तीफा देना चाहिए और न ही इस बारे में किसी से बात करनी चाहिए। बाद में जब हालात बदले और पार्टी ने फैसला लिया, तो प्रधान ने तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
कांग्रेस पर बोला हमला
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के जश्न मनाने पर तंज कसते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस पड़ोसी के घर में बच्चे के जन्म पर ढोल पीट रही है। उन्होंने कहा कि इस छात्र आंदोलन में कांग्रेस का कोई योगदान नहीं था, वह बस पीछे खड़ी होकर राजनीति कर रही थी। पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद विपक्ष पूरी तरह से निराश हो चुका था और अब उन्हें सीजेपी के आंदोलन में उम्मीद की एक नई किरण नजर आई थी।
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36 दिनों का आंदोलन खत्म, खाली हुआ जंतर-मंतर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और मोदी सरकार द्वारा छात्रों की मांगें मान लेने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। जंतर-मंतर पर 36 दिनों से चल रहा यह प्रदर्शन खत्म हो गया है और छात्र अपने घर लौट गए हैं। यह पूरा आंदोलन परीक्षाओं में हुई धांधली और नीट पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ था।
