जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हर वर्ष आयोजित होने वाली मचैल माता यात्रा को खराब मौसम के कारण तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि अब यह यात्रा 28 जुलाई से शुरू होगी लेकिन यह भी मौसम की अनुकूल स्थिति पर निर्भर करेगा। किश्तवाड़ की खूबसूरत पद्दर घाटी में समुद्र तल से 9,705 फुट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर की 304.7 किलोमीटर लंबी यात्रा जम्मू से शुरू होती है।
श्रद्धालु लगभग पूरी दूरी सड़क मार्ग से तय करते हैं और मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम 1.7 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने तय किया है कि श्रद्धालुओं को सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे के बीच ही यात्रा करने की अनुमति होगी। इसके अलावा प्रतिदिन अधिकतम 8,000 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी।
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अधिकारी ने बताया कि ये निर्णय किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। उन्होंने कहा कि यात्रा के लिए पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन और अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) प्रणाली लागू की गई है।
मचैल माता मंदिर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले चिसोटी गांव में 14 अगस्त 2025 को बादल फटने की भीषण घटना हुई थी। इस हादसे में 63 लोगों की मौत हो गयी थी जिनमें अधिकतर श्रद्धालु थे। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे और करीब 30 लोग लापता हो गए थे।
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उपायुक्त ने बताया कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार 25 जुलाई को मंदिर के पवित्र कपाट खोले जाएंगे। इस अवसर पर मचैल में पुजारी और स्थानीय लोग पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इसके बाद मौसम की स्थिति का आकलन करने के बाद यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 28 जुलाई से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू कर दी जाएगी।
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उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा करने की अपील की। उपायुक्त ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किश्तवाड़ के सरकूट स्थित गौरी शंकर मंदिर आधार शिविर में दो आरएफआईडी यात्रा पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा गुलाबगढ़ में भी करीब छह पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं।
किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेश सिंह ने बताया कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना तथा विशेष पुलिस चौकियां तैनात की गई हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका सख्ती से पालन करें, निर्धारित यात्रा समय का अनुपालन करें तथा प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करें।
