भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने बुधवार को बीमा वेबसाइट पर ‘डार्क पैटर्न’ यानी भ्रामक डिजाइन वाले तौर-तरीके पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा। इसमें ऐसी व्यवस्था भी शामिल है, जिसमें उत्पाद की विशेषताओं और कीमत की जानकारी देखने के लिए ग्राहकों से व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाती है। ‘डार्क पैटर्न’ से आशय वेबसाइट या ऐप के ऐसे भ्रामक डिजाइन और तौर-तरीकों से है, जिनके जरिये उपयोगकर्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध बीमा खरीदने, अधिक प्रीमियम का भुगतान करने या अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए उकसाया जाता है।
इरडा ने बीमा वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और ग्राहक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से व्यापक सुधारों के तहत ‘बीमा वितरण की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव’ पर एक परामर्श पत्र जारी किया है। इसमें बीमा वितरण, उसकी संरचना, खर्च, कमीशन, बाजार आचरण, पारदर्शिता और डिजिटल बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल से जुड़े सुधारों का व्यापक खाका पेश किया गया है। नियामक ने मौजूदा जटिल व्यवस्था की जगह वितरण से जुड़ी इकाइयों की तीन व्यापक श्रेणियां बनाने का प्रस्ताव किया है।
इनमें बीमा वितरण इकाइयां (आईडीई), बीमा वितरण व्यक्ति (आईडीपी) और बाजार बुनियादी ढांचा संस्थान (एमआईआई) शामिल हैं। परामर्श पत्र में कहा गया है कि प्रबंधन व्यय (ईओएम) व्यवस्था में चरणबद्ध तरीके से कम सीमा लागू कर बदलाव करने का प्रस्ताव है। जीवन बीमा कंपनियों के लिए प्रबंधन व्यय की सीमा कंपनी के स्तर पर सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (जीडीपीआई) से जोड़ी जाएगी।
इसे दो साल में 15 और पांच साल में 12.5 प्रतिशत तक लाने का प्रस्ताव है। साधारण बीमा कंपनियों के लिए आधार सकल प्रीमियम (जीडब्ल्यूपी) से बदलकर घरेलू सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (जीडीपीआई) किया जाएगा। पांच साल में प्रबंधन व्यय की सीमा सकल प्रीमियम के 30 प्रतिशत से घटाकर घरेलू सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय के 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
इसके लिए हर साल चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी। इरडा ने कहा, ‘‘प्रबंधन व्यय में प्रस्तावित कमी का उद्देश्य बीमा की कुल लागत घटाना है। इससे साधारण बीमा में जोखिम का दायरा बढ़ाने और जीवन बीमा की बचत योजनाओं में पॉलिसीधारकों के लिए बेहतर प्रतिफल देने में मदद मिलेगी।
इरडा ने परामर्श पत्र पर 25 अक्टूबर तक टिप्पणियां मांगी हैं। परामर्श पत्र में बाजार अनुशासन मजबूत करने के लिए ‘डार्क पैटर्न’ की निगरानी और संबंधित प्रदर्शन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है। इसमें कहा गया है कि सभी बीमा कंपनियों को उत्पाद, कीमत और गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी एक समान और आसानी से समझ आने वाले रूप में उपलब्ध करानी चाहिए तथा इसके लिए ग्राहकों से व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जानी चाहिए।
फिलहाल आम लोग उत्पाद की विशेषताओं और कीमत की जानकारी तभी देख सकते हैं, जब वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इरडा ने कहा, ‘‘अधिकांश बीमा कंपनियों और वितरणकर्ताओं की वेबसाइट पर अक्सर देखा जाने वाला यह एक ‘डार्क पैटर्न’ है। यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा जारी दिशानिर्देशों के भी खिलाफ है।
इसलिए इरडा ने बीमा नियमों के तहत ‘डार्क पैटर्न’ पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है।’’
परामर्श पत्र में कमीशन व्यवस्था में भी बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। समान व्यवस्था के बजाय कमीशन की सीमा तय करते समय क्षेत्र, कारोबार की प्रकृति, वितरण माध्यम, उत्पाद की जटिलता तथा उत्पाद बेचने और उसकी सेवा देने में लगने वाले प्रयास को ध्यान में रखा जाएगा। इसमें कहा गया, ‘‘बीमा कंपनियों और बड़े वितरण संस्थानों को कमीशन की नीतियों और ढांचे की जानकारी सरल और आसानी से उपलब्ध रूप में देनी होगी।
वहीं, कुछ निर्धारित वाणिज्यिक पॉलिसियों में कमीशन का खुलासा करना होगा।’’
इरडा ने बीमा की गलत बिक्री रोकने के लिए कड़े उपायों का भी प्रस्ताव किया है। इसके तहत ग्राहकों की जरूरत और उनके लिए बीमा के सही विकल्प होने की जानकारी दर्ज करना तथा बिक्री से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखना जरूरी होगा। बीमा नियामक ने कहा कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य ग्राहक-केंद्रित, प्रतिस्पर्धी, दक्ष और पारदर्शी बीमा वितरण व्यवस्था तैयार करना है, जिससे पॉलिसीधारकों, बीमा कंपनियों और वितरणकर्ताओं के लिए बेहतर और टिकाऊ परिणाम सुनिश्चित हो सकें।
