अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में जहाँ एक तरफ प्रगति के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे संवेदनशील एनर्जी चोकपॉइंट—होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—के नियंत्रण को लेकर दोनों देशों में ठन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “पूरे कंट्रोल” वाले दावे को सीधी चुनौती देते हुए ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज़ जलमार्ग अब कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा, बल्कि यह पूरी तरह “ईरानी व्यवस्था” के तहत संचालित होगा। यह विरोधाभास दिखाता है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जिसे “सफल अंतिम समझौते की अच्छी नींव” बता रहे हैं, उसकी राह में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका-ईरान बातचीत के ताज़ा दौर को “एक सफल अंतिम समझौते के लिए अच्छी नींव” बताया। लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ की टिप्पणियाँ बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती हैं, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के भविष्य के बारे में, जो दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है।
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‘होर्मुज़ कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा’
स्विट्जरलैंड में बातचीत से लौटते हुए ग़ालिबाफ़ ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य कभी भी युद्ध से पहले वाली स्थिति में नहीं लौटेगा और इसके बजाय “ईरानी व्यवस्था” के तहत काम करेगा। उन्होंने कहा, “युद्ध की शुरुआत में ही साफ़ तौर पर कहने वालों में मैं सबसे पहले था कि सभी को पता होना चाहिए कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रबंधन कभी भी वैसा नहीं होगा जैसा युद्ध से पहले था।” ग़ालिबाफ़ ने वॉशिंगटन के प्रति ईरान के गहरे अविश्वास को भी दोहराया और साफ़ कहा कि “ईरान ने कभी भी अमेरिकियों पर भरोसा नहीं किया और कभी करेगा भी नहीं।”
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हॉटलाइन समझौता
कड़े रुख के बावजूद, ईरान ने पुष्टि की कि दोनों पक्ष होर्मुज़ जलडमरूमध्य में घटनाओं को रोकने के लिए सीधी बातचीत की व्यवस्था बनाने पर सहमत हुए हैं। ग़ालिबाफ़ के अनुसार, तेहरान और वॉशिंगटन एक “टेलीफ़ोन हॉटलाइन और समन्वय केंद्र” बनाने पर सहमत हुए हैं, जिससे जहाज़ संपर्क कर सकें, अगर इस रणनीतिक जलमार्ग से गुज़रते समय कोई विवाद, भ्रम या नेविगेशन से जुड़ी चिंता पैदा हो।
ग़ालिबाफ़ ने कहा, “अगर अमेरिकियों को किसी चीज़ पर कोई आपत्ति है, या किसी जहाज़ को किसी रूट या किसी चीज़ पर स्पष्टता चाहिए, तो वे कॉल कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों को सख्ती से लागू करेगा और किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए तेज़ी से कदम उठाएगा।
ट्रंप ने ‘पूरे कंट्रोल’ वाली बात पर ज़ोर दिया
जबकि ईरान जलडमरूमध्य के प्रबंधन में ज़्यादा अहम भूमिका का दावा कर रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ज़ोर दिया है कि वॉशिंगटन का ही मज़बूती से नियंत्रण बना हुआ है। मंगलवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर अमेरिका का “पूरा कंट्रोल” है और इस समुद्री रास्ते को खुला रखने का श्रेय अमेरिकी नौसेना की ताकत को दिया।
ट्रंप ने कहा, “स्ट्रेट पर हमारा पूरा कंट्रोल है। हमारे पास नौसेना है, वहां एक नाकेबंदी (ब्लॉकेड) थी, जो बम गिराने से ज़्यादा असरदार थी। होर्मुज़ स्ट्रेट के मामले में हम बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” अलग-अलग तरह के ये बयान दिखाते हैं कि खाड़ी में संघर्ष के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तेहरान और वॉशिंगटन की सोच में कितना अंतर है।
फाइनल डील का रोडमैप
बातचीत का ताज़ा दौर सोमवार को खत्म हुआ, जिसमें दोनों पक्ष 60 दिनों के अंदर एक व्यापक समझौते तक पहुँचने के रोडमैप पर सहमत हुए। एक संयुक्त बयान के मुताबिक, तेहरान और वॉशिंगटन ने तुरंत तकनीकी बातचीत शुरू करने का वादा किया है और फाइनल समझौते की दिशा में हो रही प्रगति की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है।
बयान में लेबनान को शामिल करते हुए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन मैकेनिज्म’ (टकराव रोकने का तरीका) बनाने की भी घोषणा की गई, ताकि फिर से सैन्य तनाव न बढ़े और नाज़ुक सीज़फायर प्रक्रिया सुरक्षित रहे। वेंस ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन व्यापार को बढ़ावा देने और आर्थिक जुड़ाव को प्रोत्साहित करने की व्यापक कोशिश के तहत ईरान की कुछ फ्रीज़ की गई संपत्तियों को अनफ्रीज़ करने पर विचार कर सकता है।
बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दावा किया कि तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट को प्रतिबंधों से छूट दी गई है, नाकेबंदी हटा ली गई है और पुनर्निर्माण व विकास की व्यापक पहल के तहत कुछ फ्रीज़ की गई संपत्तियां जारी की जा रही हैं। हालांकि, बातचीत के बाद जारी संयुक्त बयान में संपत्ति जारी करने का कोई साफ़ ज़िक्र नहीं था, जिससे आर्थिक रियायतों के दायरे को लेकर सवाल अभी भी अनसुलझे हैं।
