सज्जाद हुसैन
इस्लामाबाद, 29 अगस्त पाकिस्तान ने कहा है कि इस्लामाबाद को सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत उसके हिस्से के पानी से वंचित करने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय सुरक्षा पर “गंभीर परिणाम” होंगे। एक मीडिया रिपोर्ट से यह बात सामने आई है। ‘द डॉन’ अखबार की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इसहाक डार ने ‘सिंधु जल संधि : दक्षिण एशिया की सुरक्षा दोराहे पर’ विषय पर आयोजित संगोष्ठि को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि यह मुद्दा द्विपक्षीय रिश्तों से कहीं आगे का है और इसका संबंध “संधियों की पवित्रता” से है।
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु नदी घटी की छह नदियों के पानी के बंटवारे के लिए हुए समझौता है, जिसमें तीन पूर्वी नदियां भारत को और तीन पश्चिमी नदियां पाकिस्तान को आवंटित की गई हैं। पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत ने अप्रैल 2025 में इसे “स्थगित” कर दिया था। डार ने कहा, “इस संधि में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी भी पक्ष को इसे एकतरफा तौर पर निलंबित करने या कुछ समय के लिए रोकने की इजाजत दे।”
उन्होंने कहा कि कोई भी देश “एकतरफा राजनीतिक घोषणा के जरिये अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीरतापूर्वक स्वीकार किए गए दायित्वों को खत्म नहीं कर सकता।”
डार ने कहा कि यह मामला द्विपक्षीय रिश्तों से कहीं आगे है और इसका संबंध “संधियों की पवित्रता” तथा “अंतरराष्ट्रीय कानून में भरोसे” से है।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने हमेशा बातचीत, कूटनीति और संधि के तहत निर्धारित किए गए तरीकों के जरिये मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की है।”
डार ने कहा कि यह मुद्दा पाकिस्तान के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि उसकी खेती, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, आजीविका और आर्थिक विकास काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, “सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान को कानूनी तौर पर आवंटित पानी से वंचित करने की किसी भी कोशिश के क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे।
