प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए पांच सूत्री योजना प्रस्तुत की, जिसे उन्होंने आगामी पीढ़ियों के समृद्ध भविष्य के लिए “गंगा-महाकम विजन” का नाम दिया।
इंडोनेशियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “गंगा और महाकम की धाराओं की तरह, हमारी सभ्यताएं सदियों से विचारों, आस्था, व्यापार और संस्कृति के माध्यम से जुड़ी हुई हैं। आज, इस ऐतिहासिक प्रवाह में भविष्य के लिए नई ऊर्जा भरने के लिए, मैं आप सभी के समक्ष ‘गंगा-महाकम विजन’ प्रस्तुत करना चाहता हूं। यह विजन हमारी साझेदारी को केवल वर्तमान आकांक्षाओं और आवश्यकताओं तक सीमित नहीं रखता; यह भावी पीढ़ियों के लिए शांति, समृद्धि, सुरक्षा और साझा प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तावित पांच सूत्री रोडमैप में सभ्यतागत जुड़ाव, साझा विकास, सुरक्षा और रणनीतिक विश्वास, समुद्री समृद्धि और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनना शामिल है। हमारा साझा इतिहास भविष्य को मज़बूत बनाने का आधार है। इसके लिए मेरा प्रस्ताव है कि हम ‘भारत-इंडोनेशिया सभ्यतागत संवाद’ (India-Indonesia Civilizational Dialogue) शुरू करें। साझा विकास पर उन्होंने कहा कि दोनों देश आगे बढ़ने की राह में कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। हम राष्ट्रीय क्षमताओं को मज़बूत करेंगे। पीएम मोदी ने आतंकवाद, साइबर खतरों और समुद्री चुनौतियों को दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों के तौर पर गिनाया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का रणनीतिक भरोसा इंडो-पैसिफिक में स्थिरता का एक स्तंभ बनेगा।
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समुद्री समृद्धि के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी साझा समुद्री भौगोलिक स्थिति को साझा समुद्री समृद्धि में बदलेंगे। सबंग से ग्रेट निकोबार तक, मलक्का गेटवे से इंडो-पैसिफिक तक—हम कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री सुरक्षा और व्यापार में मज़बूती के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ के तौर पर वे लोगों की आकांक्षाओं को मज़बूत करेंगे और “ऐसी विश्व व्यवस्था के लिए काम करेंगे जिसमें विकास समावेशी हो, तकनीक तक सबकी पहुँच हो, और वैश्विक शासन व्यवस्था न्यायपूर्ण व सबकी भागीदारी वाली हो।
