हॉकी इंडिया लीग को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश अब तेज होती दिख रही है। खेल मंत्रालय ने संकट से जूझ रही इस लीग के भविष्य पर काम करने के लिए 7 सदस्यीय समिति का औपचारिक गठन कर दिया है। समिति में खेल मंत्रालय, हॉकी इंडिया और लीग की फ्रेंचाइजी टीमों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह कदम खेल मंत्री मनसुख मांडविया की सितंबर में हुई बैठक के बाद उठाया गया है। इस बैठक में हॉकी इंडिया के अधिकारियों और हॉकी इंडिया लीग की फ्रेंचाइजी से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रतियोगिता के सामने आ रही आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं की जानकारी मंत्री को दी थी। इसके बाद मंत्री ने लीग के संचालन ढांचे, आर्थिक व्यवस्था और भविष्य की योजना पर प्राथमिकता से काम करने के निर्देश दिए थे।
नई समिति में खेल मंत्रालय के खेलो इंडिया से जुड़े संयुक्त सचिव विनील कृष्ण, हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की, महासचिव भोला नाथ सिंह और कोषाध्यक्ष सेकर जे. मनोहरन शामिल हैं। इसके अलावा 3 फ्रेंचाइजी प्रतिनिधियों को भी समिति में जगह दी गई है। इनमें आलोक सांघी, महेश भूपति और दिव्यांशु सिंह के नाम शामिल हैं।
बता दें कि सितंबर की बैठक के बाद भी ऐसी ही एक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें हॉकी इंडिया, फ्रेंचाइजी और खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने थे। अब सरकार ने इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देते हुए 7 सदस्यीय समिति बना दी है। समिति को तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंपनी होगी।
समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती लीग की आर्थिक स्थिति और उसके संचालन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना है। फ्रेंचाइजी लंबे समय से लीग के प्रशासन और आर्थिक ढांचे को लेकर ज्यादा स्पष्टता चाहती हैं। बढ़ती लागत और टीमों की भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता ने लीग की अगली पारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि महिला हॉकी इंडिया लीग को बंद किए जाने की आशंका के बीच भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे और सविता पूनिया समेत कई खिलाड़ियों ने अगस्त में विश्व कप के दौरान भावुक अपील की थी। खिलाड़ियों ने आर्थिक संकट से जूझ रही महिला लीग को बचाने की मांग की थी। विश्व कप में भारतीय टीम 5वें स्थान पर रही थी, जो 1974 के बाद उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन था।
हॉकी इंडिया लीग की शुरुआत के बाद इसे भारतीय खिलाड़ियों को घरेलू स्तर पर मजबूत मुकाबले और विदेशी खिलाड़ियों के साथ खेलने का अनुभव देने वाला अहम मंच माना गया है। बता दें कि 7 साल के अंतराल के बाद 2024 में इसे दोबारा शुरू किया गया था। इसके बाद लीग ने भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों को एक साथ खेलने का अवसर दिया, लेकिन अब इसकी आर्थिक स्थिरता सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
इस पूरे मामले में हॉकी इंडिया के भीतर चल रहा प्रशासनिक मतभेद भी महत्वपूर्ण है। अध्यक्ष दिलीप तिर्की और महासचिव भोला नाथ सिंह के बीच हाल के हफ्तों में कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अलग-अलग राय सामने आई है। विश्व कप से पहले जर्सी विवाद को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद चर्चा में रहा था।
ऐसे में नई समिति के सामने केवल आर्थिक मॉडल तैयार करने की चुनौती नहीं है, बल्कि लीग के संचालन को लेकर सभी पक्षों के बीच भरोसा और स्पष्टता कायम करना भी जरूरी है। अब उसकी रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि हॉकी इंडिया लीग को किस तरह लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत और खिलाड़ियों के लिए उपयोगी प्रतियोगिता बनाया जा सकता हैं।
