कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पीएम के भाषण में कांग्रेस का बार-बार जिक्र होने पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस पार्टी नहीं होती, तो प्रधानमंत्री किस नाम की माला जपते? उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री की घबराहट को दर्शाता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर राजनीति
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को एक ‘राजनीतिक ढाल’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ‘अलोकतांत्रिक परिसीमन’ करना चाहती है ताकि वह जाति जनगणना के मुद्दे से बच सके।
उन्होंने कहा कि उनकी यह योजना अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और प्रधानमंत्री इसी कारण घबराए हुए हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी शर्तों को हटाकर बिना देरी के महिलाओं को 543 सीटों में से 181 सीटें दें।
#WATCH | Delhi: On PM’s address to the nation, Congress leader Supriya Shrinate says, “… In his 29‑minute speech, Prime Minister Modi mentioned Congress 58 times… Out of 543 seats, one‑third should be reserved immediately, giving 181 seats to women. Instead, he resists… pic.twitter.com/08ZApVwZCr
— ANI (@ANI) April 19, 2026
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बीजेपी के ट्रैक रिकॉर्ड पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी सरकार के महिलाओं के प्रति रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बीजेपी के मात्र 12.9 फीसदी सांसद महिला हैं और देश भर में उनके 10 प्रतिशत से भी कम विधायक महिलाएं हैं। श्रीनेत ने हाथरस और मणिपुर जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए पीएम मोदी के ‘महिला सम्मान’ के दावे को कमजोर बताया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देश की महिलाएं सब देख और समझ रही हैं और समय आने पर वे अपने अपमान का हिसाब जरूर लेंगी।
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सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप
सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव प्रक्रिया चल रही है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इस तरह का भाषण देना चुनावी मानदंडों के खिलाफ है। उन्होंने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री का जनता से सीधा संपर्क अब टूट चुका है और उनके आसपास के लोग उन्हें सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
