(भारत शर्मा)
नयी दिल्ली, छह अक्टूबर हरमनप्रीत कौर के कप्तानी से इस्तीफा देने के बाद स्मृति मंधाना का भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान बनना लगभग तय माना जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि क्या बाएं हाथ की इस 30 वर्षीय बल्लेबाज को नेतृत्व की जिम्मेदारी मिलने में देर हो गई है जबकि वह इस समय देश की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में काफी आगे हैं। वर्ष 2016 में पहली बार भारत की कप्तानी करने वाली हरमनप्रीत ने बीसीसीआई के साथ समीक्षा बैठक के बाद तीनों प्रारूपों की कप्तानी से हटने का फैसला किया। मोगा की 37 वर्षीय खिलाड़ी ने कप्तान के रूप में अपने शानदार अपने कार्यकाल का अंत बेहतरीन अंदाज में किया।
उन्होंने हाल ही में जापान में भारत को लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक दिलाया। बीसीसीआई की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन स्मृति का हरमनप्रीत की जगह कप्तानी संभालना स्वाभाविक विकल्प है। वर्ष 2013 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाली यह स्टार सलामी बल्लेबाज अब खेल की प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल है और तीनों प्रारूपों में 10,000 से अधिक रन बना चुकी हैं।
कौशल के मामले में स्मृति हमेशा बाकी खिलाड़ियों से आगे रही हैं और अब उन्होंने अपने खेल में आक्रामकता जोड़कर खुद को और निखारा है। यह कोई रहस्य नहीं था कि भारत के पिछले साल घरेलू मैदान पर एकदिवसीय विश्व कप जीतकर आईसीसी खिताब के सूखे को खत्म करने के बावजूद चयनकर्ताओं द्वारा कप्तानी में यथास्थिति बनाए रखने से स्मृति निराश थीं। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने भारत की कप्तानी करने के लिए अपनी तैयारी जाहिर की थी और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कहा था कि भारत को इससे भी बड़े टूर्नामेंट जीतने का लक्ष्य रखना चाहिए।
एकदिवसीय विश्व कप की सफलता के बीच भारत लगातार दो टी20 विश्व कप में जल्दी बाहर हो गया था जिससे सबसे छोटे प्रारूप में टीम के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन चयनकर्ताओं ने तब बदलाव नहीं किया। हालांकि बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया की अध्यक्षता में गुवाहाटी में हुई समीक्षा बैठक में हरमनप्रीत को यह स्पष्ट कर दिया गया कि नेतृत्व में बदलाव अब अपरिहार्य है।
इसके बाद उन्होंने खुद ही कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। हरमनप्रीत और स्मृति के बीच कप्तानी को लेकर मतभेद भी एक पेचीदा मुद्दा बन गया था जबकि दोनों पहले काफी अच्छी तरह घुलती-मिलती थीं। टीम के एक सूत्र ने कहा, ‘‘वे कुछ समय से कई मुद्दों पर एकमत नहीं थीं और इससे ड्रेसिंग रूम में असहजता साफ दिखाई देने लगी थी।’’
इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन में हुए टी20 विश्व कप से भारत के बाहर होने के बाद दिग्गज खिलाड़ी मिताली राज ने पीटीआई से कहा था कि चयनकर्ताओं को दो-तीन साल पहले ही स्मृति को कप्तानी सौंप देनी चाहिए थी।
उन्होंने हरमनप्रीत की फॉर्म और फिटनेस पर भी सवाल उठाए थे। मिताली ने कहा था, ‘‘मुझे लगा था कि दो-तीन साल पहले ही उन्हें वनडे की कप्तानी दे दी जाएगी। वह अब भी वनडे और टेस्ट की कप्तानी कर सकती हैं और टी20 की कप्तानी शेफाली (वर्मा) जैसी किसी युवा खिलाड़ी को दी जा सकती है।’’
महिला क्रिकेट को पुरुष टीम जितनी कड़ी समीक्षा का सामना नहीं करना पड़ता लेकिन नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चयनकर्ताओं की ओर से यह पहली चूक नहीं है।
विश्व कप 2022 के बाद जब हरमनप्रीत ने मिताली से एकदिवसीय कप्तानी संभाली थी तब दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच संबंध बेहद खराब दौर से गुजर रहे थे। इससे टीम में गुटबाजी पैदा हुई थी। अब हरमनप्रीत अगले दो-तीन साल खिलाड़ी के रूप में खेलना जारी रखना चाहती हैं और ऐसे में यह देखना होगा कि क्या वह और स्मृति टीम के हित में पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ पाती हैं।
हालांकि भारत ने हाल में एशिया कप और एशियाई खेलों में दबदबा बनाया लेकिन हरमनप्रीत अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं थीं। टीम में अब एक विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में उनसे उम्मीदें बढ़ना तय है और भारतीय टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए उन्हें अपने खेल के स्तर में काफी सुधार करना होगा।
