अहमदाबाद, पांच अक्टूबर गुजरात में वकीलों ने ‘किराया विधेयक, 2026’ के विरोध में सोमवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी, जिससे कई जगहों पर अदालती कामकाज प्रभावित हुआ। वहीं, महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को बताया कि यह विधेयक “कभी लागू नहीं हो पाएगा।”
गुजरात विधानसभा की ओर से 11 सितंबर को पारित किराया विधेयक, 2026 को ‘गुजरात किराया, होटल और लॉजिंग हाउस दर नियंत्रण अधिनियम, 1947’ की जगह लेनी है। यह विधेयक मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों और दायित्वों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है।
हालांकि, वकीलों का कहना है कि किराया विवाद सुलझाने का काम अदालतों से हटाकर प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपने से न्यायिक सुरक्षा कमजोर होगी और मुकदमा लड़ने वालों के लिए मुश्किलें पैदा होंगी। वकीलों ने लगातार तीन दिन तक विरोध-प्रदर्शन करने के बावजूद मामला अनसुलझा रहने के बाद हड़ताल शुरू कर दी। गुजरात उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ (जीएचसीएए) ने भी वकीलों से न्यायिक काम से दूर रहने का आह्वान किया।
अहमदाबाद में कोई भी निजी वकील उच्च न्यायालय में पेश नहीं हुआ और वकीलों के लिए बना प्रवेश द्वार बंद रखा गया। कई अदालत कक्ष में कार्यवाही जल्दी खत्म हो गई और तय मामलों को आगे की तारीख के लिए टाल दिया गया। अहमदाबाद शहर दीवानी और सत्र न्यायालय से इनकम टैक्स सर्कल तक एक बाइक रैली निकाली गई, जहां वकीलों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध-प्रदर्शन किया।
जीएचसीएए के अध्यक्ष यतिन ओझा ने कहा कि संघ ने दो दिन तक काम से दूर रहने और उसके बाद स्थिति की समीक्षा करने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि किराया विधेयक से आम लोगों को परेशानी होगी। ओझा ने राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजे गए विधेयक को वापस लेने की मांग की।
उन्होंने कहा, “गुजरात विधानसभा की ओर से पारित विधेयक जैसा कानून तो उत्तर कोरिया में भी लागू नहीं किया जाएगा।”
रविवार को उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी और गुजरात बार काउंसिल के सदस्यों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा की गई। त्रिवेदी ने उच्च न्यायालय को सोमवार को बताया कि वकीलों को अपना विरोध-प्रदर्शन वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने हड़ताल करने वाले वकीलों को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया।
त्रिवेदी ने न्यायमूर्ति एमजे शेलात की पीठ से कहा कि राज्य सरकार ने (बार काउंसिल के सदस्यों को) भरोसा दिलाया था कि वह इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाएगी और राज्यपाल से इस पर दस्तखत न करने का अनुरोध करेगी। उन्होंने कहा, “कल उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में हमारी बार काउंसिल के सभी सदस्यों के साथ बैठक हुई। सरकार ने वादा किया है कि राज्यपाल इस विधेयक पर दस्तखत नहीं करेंगे।
यह विधेयक कभी लागू नहीं होगा। हम कोशिश करेंगे कि मूल कानून को बहाल किया जाए।”
त्रिवेदी ने कहा, “ऐसे हालात में, मुझे लगता है कि यह बहुत दुखद है कि समाधान होने के बाद भी हम हड़ताल कर रहे हैं।
